तेहरान: ईरान के चाबहार पोर्ट पर अमेरिकी हमले के बाद मध्य-पूर्व में तनाव और गहरा गया है। ईरान ने चेतावनी दी है कि जिन देशों की जमीन या सैन्य सुविधाओं का इस्तेमाल उसके खिलाफ कार्रवाई के लिए किया जा रहा है, उन्हें अपनी सुरक्षा तैयारियां मजबूत करनी चाहिए।
इसी बीच ईरानी मीडिया फार्स न्यूज एजेंसी ने दावा किया है कि अगर ईरान जवाबी कार्रवाई करता है तो खाड़ी क्षेत्र के कुछ प्रमुख बंदरगाह उसके संभावित निशाने पर आ सकते हैं। हालांकि, ईरान सरकार की ओर से अब तक किसी बंदरगाह को आधिकारिक तौर पर लक्ष्य घोषित नहीं किया गया है।
फार्स न्यूज की रिपोर्ट के अनुसार, खाड़ी क्षेत्र के पांच बड़े बंदरगाहों को संभावित लक्ष्य के रूप में बताया गया है। इनमें जबेल अली पोर्ट, संयुक्त अरब अमीरात, मीना सलमान पोर्ट, बहरीन, शुएबा पोर्ट, कुवैत, हमाद पोर्ट, कतर, किंग फहद इंडस्ट्रियल पोर्ट, सऊदी अरब शामिल हैं।
रिपोर्ट में दावा किया गया है कि इन बंदरगाहों का संबंध अमेरिका के सैन्य अभियानों या कारोबारी गतिविधियों से रहा है।
ईरान की इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) ने कहा है कि जो देश ईरान विरोधी सैन्य गतिविधियों में सहयोग कर रहे हैं, उन्हें अपनी सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत करना चाहिए। IRGC ने नागरिक सुरक्षा उपायों को सक्रिय करने और संवेदनशील सैन्य क्षेत्रों से लोगों को दूर रखने की सलाह दी है।
ईरानी मीडिया रिपोर्टों के मुताबिक, IRGC ने कुवैत में मौजूद अमेरिकी सैन्य ठिकानों को निशाना बनाने का दावा किया है। इनमें कैंप अरिफजान और अली अल सालेम एयर बेस शामिल बताए गए हैं।
ईरान का कहना है कि ड्रोन और मिसाइल हमलों में अमेरिकी सैन्य सुविधाओं को नुकसान पहुंचा है। हालांकि, इन दावों की स्वतंत्र पुष्टि अभी नहीं हुई है।
इससे पहले आई खबरों के अनुसार, ईरानी हमलों में कुवैत के कुछ सैन्यकर्मी घायल हुए हैं। इसके अलावा एक बिजली उत्पादन और समुद्री पानी को पीने योग्य बनाने वाले डीसैलिनेशन प्लांट को भी नुकसान पहुंचने की बात सामने आई है।
चाबहार पोर्ट पर हमले के बाद पैदा हुआ यह तनाव अब पूरे खाड़ी क्षेत्र के लिए चिंता का विषय बन गया है। अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते टकराव का असर क्षेत्रीय सुरक्षा, ऊर्जा आपूर्ति और समुद्री व्यापार पर भी पड़ सकता है।

