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ईरान-पाकिस्तान गैस पाइपलाइन गतिरोध तोड़ने की कोशिशें तेज

इस्लामाबाद: पाकिस्तान सरकार ने संभावित करोड़ों डॉलर के जुर्माने के खतरे के बीच ईरान-पाकिस्तान गैस पाइपलाइन परियोजना पर लंबे समय से चले आ रहे गतिरोध को खत्म करने के लिए उच्चस्तरीय समिति का गठन किया है।

ईरान और पाकिस्तान के बीच प्रस्तावित गैस पाइपलाइन परियोजना को लेकर वर्षों से जारी गतिरोध को खत्म करने के लिए पाकिस्तान ने अब गंभीर प्रयास शुरू कर दिए हैं। अमेरिकी प्रतिबंधों और वित्तीय कठिनाइयों के कारण लंबे समय से अटकी इस परियोजना को लेकर पाकिस्तान सरकार ने एक उच्चस्तरीय समिति गठित की है, जो कानूनी, वित्तीय और ऊर्जा से जुड़े सभी पहलुओं की समीक्षा करेगी।

पाकिस्तान के पेट्रोलियम मंत्री अली परवेज़ मलिक ने सीनेट को बताया कि प्रधानमंत्री शहबाज़ शरीफ ने इस समिति का गठन किया है। समिति से उम्मीद की जा रही है कि वह परियोजना को आगे बढ़ाने के लिए ऐसा रास्ता सुझाएगी जो पाकिस्तान के राष्ट्रीय हितों के अनुरूप हो।

ईरान-पाकिस्तान गैस पाइपलाइन समझौते के तहत पाकिस्तान को अपने क्षेत्र में लगभग 781 किलोमीटर लंबी पाइपलाइन का निर्माण करना था। समझौते के अनुसार इसका काम दिसंबर 2014 तक पूरा किया जाना था। हालांकि, निर्धारित समय सीमा बाद में बढ़ाई गई, लेकिन पाकिस्तान अमेरिकी प्रतिबंधों और परियोजना के लिए पर्याप्त वित्तीय संसाधन जुटाने में असमर्थता के कारण अपने क्षेत्र में निर्माण शुरू नहीं कर सका।

परियोजना का उद्देश्य ईरान से पाकिस्तान तक प्राकृतिक गैस पहुंचाना है। लेकिन अंतरराष्ट्रीय प्रतिबंधों, विशेष रूप से अमेरिकी प्रतिबंधों के कारण इस परियोजना को आगे बढ़ाना पाकिस्तान के लिए लंबे समय से एक बड़ी चुनौती बना हुआ है।

पाकिस्तान सरकार अब इस बात का आकलन कर रही है कि परियोजना को पूरा न करने की स्थिति में उसे कितनी संभावित वित्तीय देनदारी का सामना करना पड़ सकता है। इसके अलावा, अंतरराष्ट्रीय अदालतों में चलने वाले संभावित मामलों और उनके आर्थिक प्रभावों की भी समीक्षा की जा रही है।

पेट्रोलियम मंत्री के अनुसार, समिति पाकिस्तान पर पड़ने वाले संभावित कर्ज और जुर्माने, न्यायिक कार्रवाई के परिणामों तथा देश की भविष्य की ऊर्जा जरूरतों का अध्ययन करेगी। इन सभी पहलुओं को ध्यान में रखते हुए परियोजना के भविष्य के लिए आगे की रणनीति तैयार की जाएगी।

पाकिस्तान लंबे समय से ऊर्जा की कमी और आयातित ईंधन पर निर्भरता की समस्या से जूझ रहा है। ऐसे में ईरान से प्राकृतिक गैस की आपूर्ति पाकिस्तान के लिए ऊर्जा सुरक्षा के लिहाज से महत्वपूर्ण मानी जाती है।

हालांकि, परियोजना को आगे बढ़ाने का फैसला पाकिस्तान के लिए आसान नहीं है, क्योंकि एक तरफ उसे अपनी बढ़ती ऊर्जा जरूरतों को पूरा करना है, जबकि दूसरी ओर अमेरिकी प्रतिबंधों और संभावित कानूनी एवं वित्तीय परिणामों को भी ध्यान में रखना होगा।

सरकार की नई समिति इसी जटिल स्थिति का समाधान तलाशने की कोशिश करेगी। पाकिस्तान का लक्ष्य यह है कि कानूनी विवाद और अतिरिक्त आर्थिक दायित्व बढ़ने से पहले परियोजना को लेकर कोई व्यावहारिक और राष्ट्रीय हित में रास्ता निकाला जा सके।

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