तेहरान : ईरान के तेल मंत्री मोहसिन पाकनेजाद ने दावा किया है कि देश ने युद्ध के दौरान भी अपने तेल निर्यात को जारी रखा और बड़ी मात्रा में राजस्व हासिल किया। उनके अनुसार, युद्ध के समय ईरान ने तेल बिक्री से लगभग 11.5 अरब डॉलर की कमाई की, जबकि युद्धविराम के दौरान जोखिम कम होने के बाद अतिरिक्त 6.5 अरब डॉलर का तेल बेचा गया।
पाकनेजाद के मुताबिक, इस तरह ईरान ने कुल मिलाकर लगभग 18 अरब डॉलर का तेल राजस्व हासिल किया। यह आय ऐसे समय में हुई जब क्षेत्रीय तनाव, समुद्री सुरक्षा जोखिम और प्रतिबंधों के कारण ईरान के ऊर्जा निर्यात पर दबाव बना हुआ था।
ईरानी तेल मंत्री ने बताया कि युद्धविराम के दौरान समुद्री टैंकरों के लिए खतरे कम हुए, जिससे ईरान को अपने तेल निर्यात को बढ़ाने का अवसर मिला। इसके परिणामस्वरूप देश अपने भंडार में जमा कच्चे तेल और गैस कंडेनसेट का एक हिस्सा अंतरराष्ट्रीय बाजार में बेचने में सफल रहा।
बताया गया कि ईरान के पास लगभग 10 करोड़ बैरल (100 मिलियन बैरल) कच्चे तेल और गैस कंडेनसेट का भंडार जमा था, जिसे धीरे-धीरे बाजार में उतारा जा रहा है।
पाकनेजाद ने कहा कि तेल बिक्री से हुई यह कुल कमाई ईरान के वार्षिक राष्ट्रीय बजट में अनुमानित तेल आय के 60 प्रतिशत से अधिक के बराबर है। इससे संकेत मिलता है कि तेल निर्यात अभी भी ईरान की अर्थव्यवस्था और सरकारी राजस्व का सबसे महत्वपूर्ण स्रोत बना हुआ है।
अमेरिका के प्रतिबंधों के बावजूद ईरान लंबे समय से अपने तेल निर्यात को बनाए रखने की कोशिश करता रहा है। इसके लिए वह नए व्यापारिक साझेदारों, वैकल्पिक भुगतान प्रणालियों और समुद्री रास्तों का इस्तेमाल करता रहा है।
विशेषज्ञों के अनुसार, अगर ईरान लगातार तेल निर्यात बनाए रखने में सफल रहता है, तो उसे विदेशी मुद्रा आय में मदद मिल सकती है। हालांकि, तेल बाजार में उतार-चढ़ाव, अंतरराष्ट्रीय प्रतिबंध और क्षेत्रीय सुरक्षा स्थिति आगे भी ईरान के ऊर्जा क्षेत्र के लिए बड़ी चुनौतियां बने रहेंगे।

