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ईरान के पलटवार से कतर-कुवैत की हालत खराब, ऊर्जा और पानी संकट का खतरा

कुवैत : अमेरिका और ईरान के बीच जारी सैन्य टकराव अब खाड़ी देशों तक पहुंचता दिख रहा है। ताजा घटनाक्रमों ने पूरे मिडिल ईस्ट में सुरक्षा और स्थिरता को लेकर चिंता बढ़ा दी है।

अमेरिका और ईरान के बीच चल रहा संघर्ष लगातार गंभीर होता जा रहा है। अमेरिकी सेना ने ईरान के कई इलाकों में लगातार छठी रात हवाई हमले किए हैं। ईरानी मीडिया के अनुसार, इन हमलों में एयरपोर्ट, रेलवे नेटवर्क, पुल और संचार से जुड़े महत्वपूर्ण ढांचों को निशाना बनाया गया। वहीं अमेरिका का कहना है कि उसका अभियान ईरान की सैन्य क्षमताओं को कमजोर करने के उद्देश्य से चलाया जा रहा है।

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप पहले ही चेतावनी दे चुके थे कि अगर ईरान बातचीत के रास्ते पर नहीं आता है तो उसकी रणनीतिक सुविधाओं को निशाना बनाया जा सकता है। ताजा हमलों के बाद ईरान ने भी जवाबी कार्रवाई की चेतावनी दी है और आशंका जताई है कि यह संघर्ष पूरे पश्चिम एशिया में फैल सकता है।

मिडिल ईस्ट में तनाव उस समय और बढ़ गया जब खाड़ी क्षेत्र के अहम देशों को लेकर हमलों की खबरें सामने आईं। रिपोर्ट्स के मुताबिक, कतर और कुवैत में महत्वपूर्ण बुनियादी ढांचों को नुकसान पहुंचने की बात कही जा रही है।

कुवैत ने दावा किया है कि उसके एक पावर स्टेशन और समुद्री पानी को पीने योग्य बनाने वाले डिसैलिनेशन प्लांट को मिसाइल और ड्रोन हमलों से नुकसान पहुंचा है। कुवैत सरकार ने इस हमले की कड़ी निंदा करते हुए इसे अपनी संप्रभुता और सुरक्षा के खिलाफ बताया है।

खाड़ी देशों में पानी की सप्लाई के लिए समुद्री पानी को मीठे पानी में बदलने वाले प्लांट बेहद महत्वपूर्ण हैं। ऐसे किसी भी प्लांट को नुकसान पहुंचने से आम लोगों की रोजमर्रा की जरूरतों पर असर पड़ सकता है।

कुवैत ने अंतरराष्ट्रीय समुदाय से इस मामले पर ध्यान देने की अपील की है और कहा है कि वह अपनी सुरक्षा के लिए जरूरी कदम उठाने से पीछे नहीं हटेगा।

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