ईरान के परमाणु कार्यक्रम को लेकर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर चिंता बढ़ गई है। संयुक्त राष्ट्र की परमाणु निगरानी संस्था इंटरनेशनल एटॉमिक एनर्जी एजेंसी (IAEA) ने बताया है कि अमेरिका और इस्राईल के हमलों के बाद ईरान की परमाणु गतिविधियों पर उसकी जानकारी काफी सीमित हो गई है।
संयुक्त राष्ट्र की वरिष्ठ अधिकारी रोजमेरी डिकार्लो ने सुरक्षा परिषद को बताया कि IAEA फिलहाल ईरान की परमाणु साइटों की पूरी स्थिति का आकलन नहीं कर पा रही है। एजेंसी को तेहरान के परमाणु ठिकानों तक जरूरी पहुंच नहीं मिल पाई है, जिससे निगरानी प्रक्रिया प्रभावित हुई है।
IAEA के अनुसार, हालिया हमलों के बाद ईरान के परमाणु कार्यक्रम से जुड़े कुछ महत्वपूर्ण हिस्सों को नुकसान पहुंचने की संभावना है। इनमें सेंट्रीफ्यूज, भारी पानी और यूरेनियम से जुड़ी सुविधाएं शामिल हैं। हालांकि, एजेंसी यह स्पष्ट रूप से नहीं बता पा रही है कि ईरान के परमाणु कार्यक्रम की मौजूदा स्थिति क्या है, क्योंकि उसे जमीनी स्तर पर जांच और सत्यापन का मौका नहीं मिला है।
रोजमेरी डिकार्लो ने बताया कि फरवरी के बाद से IAEA को ईरान की परमाणु गतिविधियों के बारे में कोई नया अपडेट नहीं मिला है। साथ ही एजेंसी ईरान में मौजूद किसी भी परमाणु स्थल पर निरीक्षण करने में भी सफल नहीं रही है।
परमाणु अप्रसार संधि (NPT) के तहत IAEA को ईरान के परमाणु कार्यक्रम की निगरानी करने का अधिकार मिला हुआ है, लेकिन मौजूदा हालात में यह निगरानी व्यवस्था प्रभावित हुई है।
संयुक्त राष्ट्र ने सभी पक्षों से अपील की है कि वे ईरान के परमाणु मुद्दे का समाधान बातचीत और कूटनीति के जरिए निकालें। संयुक्त राष्ट्र के अनुसार, किसी भी स्थायी समाधान के लिए रचनात्मक बातचीत और आपसी सहमति जरूरी है।
अंतरराष्ट्रीय समुदाय की नजर अब इस बात पर है कि ईरान और पश्चिमी देशों के बीच आगे की बातचीत किस दिशा में जाती है और क्या परमाणु कार्यक्रम को लेकर फिर से निगरानी व्यवस्था बहाल हो पाती है।

