तेहरान : ईरान ने हुर्मुज जलडमरूमध्य को लेकर अमेरिका के सामने अपना रुख साफ कर दिया है। ईरान की सर्वोच्च राष्ट्रीय सुरक्षा परिषद (SNSC) के सचिव मोहसिन रज़ाई ने कहा है कि जब तक वॉशिंगटन अपना रवैया नहीं बदलता और अपनी जिम्मेदारियां पूरी नहीं करता, तब तक हुर्मुज जलडमरूमध्य को दोबारा खोलने का सवाल नहीं उठता।
ईरानी समाचार एजेंसी IRIB को दिए इंटरव्यू में रज़ाई ने अमेरिकी दावों को खारिज करते हुए कहा कि हुर्मुज अभी भी बंद है। उनके मुताबिक, अमेरिका अगर आर्थिक दबाव की नीति जारी रखता है तो ईरान भी अपने फैसले बदलने के लिए तैयार नहीं है।
रज़ाई ने दावा किया कि अमेरिका सैन्य विकल्पों से निराश होकर अब आर्थिक दबाव का सहारा ले रहा है। उनका आरोप है कि वॉशिंगटन को उम्मीद है कि आर्थिक नाकेबंदी ईरान को सैन्य दबाव के सामने कमजोर कर सकती है।
उन्होंने यह भी दावा किया कि इस्राइल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को भरोसा दिलाया है कि कुछ महीनों की आर्थिक नाकेबंदी के बाद ईरान आत्मसमर्पण करने पर मजबूर हो जाएगा।
हालांकि, रज़ाई का कहना है कि ईरान लंबे समय से प्रतिबंधों से निपटने के तरीके विकसित करता आया है और इसी वजह से वह तेल का निर्यात जारी रखने में सक्षम है।
रज़ाई ने कहा कि ट्रंप को अपने सहयोगियों की मदद की जरूरत है और अमेरिका अकेले ईरान पर दबाव नहीं बना सकता। उन्होंने NATO और दूसरे सहयोगी देशों के समर्थन को अमेरिकी रणनीति का अहम हिस्सा बताया।
उन्होंने यह भी दोहराया कि ईरान पश्चिम एशिया में युद्ध को बढ़ाना नहीं चाहता और क्षेत्र में संघर्ष समाप्त करने के पक्ष में है।
रज़ाई ने अमेरिका के आर्थिक अभियान में शामिल होने वाले ईरान के पड़ोसी देशों को भी चेतावनी दी है। उन्होंने कहा कि तेहरान आसपास के देशों से अपेक्षा करता है कि वे अमेरिका के आर्थिक दबाव का हिस्सा न बनें।
उनके मुताबिक, यदि कोई पड़ोसी देश ईरान के खिलाफ अमेरिकी आर्थिक अभियान में शामिल होता है, तो उसे ईरान मित्र नहीं बल्कि दुश्मन मानेगा।
रज़ाई ने हालांकि कहा कि ईरान तनाव बढ़ाना नहीं चाहता, लेकिन यदि क्षेत्रीय देश अमेरिकी आर्थिक दबाव का समर्थन करते हैं तो तेहरान उनके हितों के खिलाफ कार्रवाई कर सकता है।
रज़ाई की सबसे कड़ी चेतावनी तेल निर्यात को लेकर सामने आई। उन्होंने कहा कि अगर आसपास के देश अमेरिका के साथ आर्थिक युद्ध में शामिल हुए, तो फारस की खाड़ी और हुर्मुज जलडमरूमध्य से तेल की एक बूंद भी बाहर नहीं जाने दी जाएगी।
उन्होंने यह भी संकेत दिया कि ईरान फारस की खाड़ी से तेल बाहर ले जाने वाले दूसरे रास्तों को भी निशाना बना सकता है।
हुर्मुज को लेकर रज़ाई ने ईरान के भौगोलिक प्रभाव का हवाला दिया। उन्होंने कहा कि फारस की खाड़ी के बड़े हिस्से पर ईरान की लंबी तटरेखा है और इसी आधार पर उन्होंने हुर्मुज के प्रबंधन में ईरान की भूमिका को जायज ठहराया।
उन्होंने अमेरिका को ईरानी क्षेत्र से दूर रहने की चेतावनी देते हुए कहा कि ईरान अपनी रक्षा पूरी ताकत से करेगा। रज़ाई ने अमेरिकी प्रशासन को क्षेत्र में अतिरिक्त सैनिक भेजने से भी बचने की सलाह दी और दावा किया कि ईरान किसी भी अमेरिकी सैन्य दबाव का मुकाबला कर सकता है।
यह बयान ऐसे समय आया है जब ट्रंप ने ईरान के खिलाफ अपने कथित ‘इकोनॉमिक डी-डे’ अभियान की घोषणा की है और अमेरिकी सहयोगी देशों से तेहरान को अलग-थलग करने के प्रयास में साथ देने की अपील की है।

