बगदाद: ईरान की संसद के अध्यक्ष मोहम्मद बाकिर र क़ालीबाफ़ ने इराक की अपनी यात्रा के पहले दिन इराकी संसद के अध्यक्ष हैबत अल-हल्बूसी और कई सांसदों से मुलाकात की। इस दौरान दोनों पक्षों ने द्विपक्षीय संबंधों, क्षेत्रीय परिस्थितियों और आर्थिक सहयोग सहित विभिन्न मुद्दों पर चर्चा की।
क़ालीबाफ़ ने इराकी संसद के गठन और अल-हल्बूसी के अध्यक्ष चुने जाने पर उन्हें बधाई दी। उन्होंने इराक की सरकार और जनता का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि ईरान के दिवंगत क्रांतिकारी नेता के अंतिम संस्कार में इराकी जनता और सरकार की बड़ी भागीदारी तथा अरबईन की मेजबानी सराहनीय रही है।
ईरानी संसद अध्यक्ष ने क्षेत्र की मौजूदा समस्याओं और संकटों के लिए अमेरिका और उसकी दखलंदाजी को जिम्मेदार ठहराया। उन्होंने इस्राईल को भी क्षेत्र में पैदा की गई समस्याओं का एक प्रमुख कारण बताते हुए कहा कि ब्रिटेन ने इस क्षेत्र में इस्राईल नामक “कैंसर की गांठ” स्थापित की, जिसके कारण भारी नुकसान हुआ।
क़ालीबाफ़ ने ईरान पर थोपे गए तीसरे युद्ध और ईरानी जनता के प्रतिरोध का उल्लेख करते हुए कहा कि ईरान की जनता ने प्रतिरोध, वफादारी, सैन्य शक्ति और सर्वोच्च कमांडर के नेतृत्व के माध्यम से अमेरिका की ताकत और दबदबे को चुनौती दी तथा उसे पीछे हटने पर मजबूर किया।
उन्होंने कहा कि ईरान और उसकी जनता के प्रतिरोध ने पूरी दुनिया और साम्राज्यवाद को एक महत्वपूर्ण सबक दिया है कि प्रतिरोध ही जीत का एकमात्र रास्ता है और यदि कोई युद्ध के लिए तैयार नहीं है तो बातचीत का भी कोई परिणाम नहीं निकलेगा।
क़ालीबाफ़ ने दोनों देशों के बीच संबंधों को मजबूत करने में संसदीय सहयोग के महत्व पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि संसदीय मैत्री समूहों से दोनों देशों के बीच संबंधों को मजबूत करने और द्विपक्षीय संपर्कों को आसान बनाने में मदद मिलेगी।
उन्होंने शलमचे-बसरह रेलवे लिंक, अरवंद नदी की ड्रेजिंग तथा आर्थिक संबंधों के विस्तार को दोनों देशों की महत्वपूर्ण प्राथमिकताएं बताया। क़ालीबाफ़ के अनुसार, दोनों देशों के बीच राजनीतिक और सांस्कृतिक संबंधों की तुलना में आर्थिक संबंध अभी उतने मजबूत नहीं हैं और इस क्षेत्र में सुधार की जरूरत है।
इराकी संसद के अध्यक्ष हैबत अल-हल्बूसी ने ईरानी संसदीय प्रतिनिधिमंडल का स्वागत करते हुए कहा कि ईरान के दिवंगत नेता के अंतिम संस्कार में लाखों लोगों की भागीदारी दोनों देशों के भावनात्मक, आध्यात्मिक और राजनीतिक संबंधों में एक महत्वपूर्ण मोड़ थी।
उन्होंने ईरान के खिलाफ इस्राईल की सैन्य कार्रवाई का उल्लेख करते हुए ईरानी जनता के प्रतिरोध की सराहना की। अल-हल्बूसी ने कहा कि इराक की जनता, सरकार और सभी प्रमुख राजनीतिक हस्तियां ईरान के खिलाफ इस्राईली आक्रमण के विरोध में हैं। उन्होंने भी इस्राईल को क्षेत्र के लिए “कैंसर की गांठ” बताया और उसके खत्म किए जाने की बात कही।
इराकी संसद अध्यक्ष ने इराक से अमेरिकी सैनिकों की वापसी का उल्लेख करते हुए दोनों देशों के बीच विशेष रूप से आर्थिक संबंधों को और विकसित करने पर जोर दिया।
उन्होंने ईरानी पक्ष से हुर्मुज़ जलडमरूमध्य के रास्ते इराकी तेल के निर्यात को आसान बनाने का भी अनुरोध किया।
इस पर क़ालीबाफ़ ने अमेरिका और उसके द्वारा पैदा किए गए युद्ध को क्षेत्र में असुरक्षा तथा सामान्य व्यापार मार्गों में व्यवधान का कारण बताया। उन्होंने कहा कि अमेरिका के हस्तक्षेप और क्षेत्र में असुरक्षा को दूर करने से मौजूदा समस्याओं का समाधान किया जा सकता है।
इस यात्रा में ईरान-इराक संसदीय मैत्री समूह के प्रमुख मोहम्मद तकी नक़दअली, उपाध्यक्ष मेहदी फलाह और सदस्य शहीन जहांगीरी, तथा राष्ट्रीय सुरक्षा और विदेश नीति आयोग की सदस्य सारा फलाही भी क़ालीबाफ़ के साथ मौजूद हैं।

