संयुक्त अरब अमीरात (UAE) के रणनीतिक तेल बंदरगाह फुजैरा को लेकर बड़ा दावा सामने आया है। एक शोध संस्थान HFI के अनुसार, दो विशाल तेल टैंकरों (VLCC) को निशाना बनाए जाने के बाद फुजैरा बंदरगाह की गतिविधियां प्रभावित हुई हैं और वहां से तेल निर्यात रुक गया है।
फुजैरा बंदरगाह खाड़ी क्षेत्र के सबसे महत्वपूर्ण तेल भंडारण, ट्रांसफर और ईंधन आपूर्ति केंद्रों में से एक माना जाता है। इसकी अहमियत इसलिए भी ज्यादा है क्योंकि यह होर्मुज जलडमरूमध्य के बाहर स्थित है और वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति के लिए एक महत्वपूर्ण मार्ग प्रदान करता है।
HFI ने चेतावनी दी है कि अगर फुजैरा बंदरगाह लंबे समय तक बंद रहता है तो इसका असर अंतरराष्ट्रीय तेल बाजार पर गंभीर रूप से पड़ सकता है। संस्थान ने इसकी तुलना बाब-अल-मंदेब जैसे महत्वपूर्ण समुद्री मार्गों के बाधित होने से की है।
रिपोर्ट के अनुसार, इस स्थिति के कारण करीब 60 लाख बैरल तेल वैश्विक बाजार से अस्थायी रूप से बाहर हो सकता है, जिससे कच्चे तेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव बढ़ने की संभावना है।
इस बीच, ईरान के इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) ने चेतावनी दी है कि अगर अमेरिका वैश्विक बाजारों तक तेल और गैस की आपूर्ति के रास्तों को असुरक्षित बनाता है, तो उसे उन अन्य ऊर्जा मार्गों पर भी असर के लिए तैयार रहना होगा जो अमेरिका और उसके सहयोगियों के हितों से जुड़े हैं।
HFI ने यह भी दावा किया कि अमेरिकी सुरक्षा व्यवस्था UAE के तेल बुनियादी ढांचे की पूरी सुरक्षा सुनिश्चित नहीं कर सकी। इस घटनाक्रम के बाद खाड़ी क्षेत्र में ऊर्जा सुरक्षा और समुद्री व्यापार को लेकर चिंताएं बढ़ गई हैं।
वहीं, समुद्री सेवा कंपनी स्टोल्ट-नीलसन के प्रमुख ने वॉल स्ट्रीट जर्नल से बातचीत में चिंता जताई कि संघर्ष अगर होर्मुज जलडमरूमध्य से आगे फैलता है तो वैश्विक शिपिंग कंपनियों के लिए जोखिम और बढ़ सकता है।
हुर्मुज़ जलडमरूमध्य दुनिया के सबसे व्यस्त तेल मार्गों में शामिल है, जहां से बड़ी मात्रा में वैश्विक तेल आपूर्ति गुजरती है। इस क्षेत्र में किसी भी तरह का सैन्य तनाव अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा बाजार, तेल कीमतों और समुद्री परिवहन पर सीधा प्रभाव डाल सकता है।

