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यमन की सऊदी अरब को कड़ी चेतावनी: सनआ हवाई अड्डा खोलना हमारा संप्रभु अधिकार 

यमन की सऊदी अरब को कड़ी चेतावनी: सनआ हवाई अड्डा खोलना हमारा संप्रभु अधिकार 

यमन के विदेश मंत्रालय ने हाल ही में सऊदी पक्ष के बयानों और तथ्यों को तोड़-मरोड़कर पेश करने तथा जनमत को गुमराह करने की कोशिशों की कड़ी निंदा करते हुए एक बयान जारी किया है। मंत्रालय ने स्पष्ट किया कि सनआ अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे को फिर से खोलना यमन का संप्रभु अधिकार है और इस संबंध में यमन किसी भी पक्ष से अनुमति लेने का मोहताज नहीं है। सनआ अपने अधिकार के तहत इस दिशा में आगे बढ़ता रहेगा।

बयान में आगे कहा गया है कि, “हम यमन में सर्वशक्तिमान ईश्वर पर भरोसा रखते हुए नाकेबंदी को तोड़ने और जनता की पीड़ाओं को समाप्त करने की प्रक्रिया के शुरुआती चरण में हैं। सऊदी शासन को यह समझ लेना चाहिए कि अभी कई और चरण बाकी हैं, जिनके माध्यम से हमारी महान और सम्मानित जनता के छीने गए अधिकार वापस लिए जाएंगे तथा वर्षों से चली आ रही पीड़ा और वंचना का अंत किया जाएगा।”

मंत्रालय ने कहा कि वर्षों से जारी नाकेबंदी ने यमन की जनता को भारी मानवीय संकट में धकेल दिया है। दवाओं, खाद्य सामग्री और आवश्यक वस्तुओं की कमी के कारण लाखों लोग कठिन परिस्थितियों में जीवन जीने को मजबूर हुए हैं। ऐसे में नाकेबंदी को समाप्त करना केवल एक राजनीतिक मुद्दा नहीं, बल्कि करोड़ों यमनियों का मानवीय और वैधानिक अधिकार है।

यमन के विदेश मंत्रालय ने अपने बयान में सऊदी नेतृत्व को चेतावनी देते हुए कहा कि उन्हें अपने तेल प्रतिष्ठानों, आरामको कंपनी, यनबु क्षेत्र और अन्य बंदरगाहों के साथ-साथ अपने वित्तीय बाज़ारों, शेयर बाज़ार, विज़न 2030 तथा अन्य आर्थिक परियोजनाओं पर गंभीरता से विचार करना चाहिए। शायद इससे वे विवेक से काम लें और समझ सकें कि यदि उन्होंने किसी भी प्रकार की मूर्खतापूर्ण कार्रवाई की, तो उन्हें कितनी बड़ी और विनाशकारी कीमत चुकानी पड़ सकती है।

यदि सऊदी अरब ने यमन के खिलाफ किसी भी प्रकार का नया दुस्साहस किया, तो उसे ऐसे गंभीर परिणामों का सामना करना पड़ सकता है जो उसकी अर्थव्यवस्था और रणनीतिक हितों पर गहरा प्रभाव डालेंगे। इसलिए सऊदी नेतृत्व को टकराव के बजाय विवेकपूर्ण और यथार्थवादी नीति अपनानी चाहिए।

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