Site icon ISCPress

यमन का दक्षिणी सऊदी अरब पर मिसाइल और ड्रोन हमला

यमन का दक्षिणी सऊदी अरब पर मिसाइल और ड्रोन हमला

सऊदी अरब के दक्षिण-पश्चिमी इलाकों में हवाई हमले की चेतावनी देने वाले सायरन बजने के साथ ही ख़मीस मुशैत और अबहा शहरों में कई धमाकों की आवाज़ें भी सुनी गईं। स्थानीय सूत्रों ने गुरुवार तड़के बताया कि दक्षिण-पश्चिमी सऊदी अरब में हवाई हमले की चेतावनी देने वाले सायरन सक्रिय हो गए। रिपोर्टों के मुताबिक, यमन की सेना और सशस्त्र बलों द्वारा किए गए व्यापक मिसाइल और ड्रोन हमलों के बाद ख़मीस मुशैत और अबहा शहरों में जोरदार धमाकों की कई आवाज़ें सुनाई दीं।

नज़रान और जिज़ान में सऊदी तेल एवं आर्थिक प्रतिष्ठानों को निशाना बनाया गया

यमनी पक्ष ने इन कार्रवाइयों को केवल एकतरफा सैन्य हमला नहीं, बल्कि सऊदी सैन्य कार्रवाइयों के जवाब के रूप में पेश किया है। हूती सैन्य प्रवक्ता याह्या सारी के अनुसार, हमलों में ख़मीस मुशैत एयर बेस तथा अबहा, नज़रान और जिज़ान में सऊदी तेल एवं आर्थिक प्रतिष्ठानों को निशाना बनाया गया। यमनी पक्ष का दावा है कि यह कार्रवाई यमन में सऊदी हवाई हमलों के जवाब में की गई।

बताया जा रहा है कि यमनी सेना इन इलाकों में स्थित सऊदी हवाई अड्डों और सैन्य ठिकानों को निशाना बना रही है। इन्हीं ठिकानों से सऊदी लड़ाकू विमानों ने यमन के इलाकों पर हवाई हमले किए थे। इससे कुछ समय पहले सऊदी वायुसेना ने अल-नार पर्वतीय क्षेत्र के आसपास, अल-मुख़ा बंदरगाह के पूर्व में, बमबारी की थी। बताया गया है कि इस हमले का उद्देश्य यमनी सशस्त्र बलों को सऊदी समर्थित लड़ाकों के ठिकानों की ओर आगे बढ़ने से रोकना था।

इसी बीच, हैस, अल-ख़ौख़ा और अल-यिख़्तल शहरों से सऊदी समर्थित लड़ाकों के बड़ी संख्या में भागने और आत्मसमर्पण करने की खबरें सामने आई हैं। इसके बाद यमनी प्रतिरोध बल इस क्षेत्र में दाखिल हो गए और अल-मुख़ा बंदरगाह से लगभग 15 किलोमीटर की दूरी तक पहुंच गए हैं।

यमनी प्रतिरोध का व्यापक संदेश

यमनी पक्ष की रणनीति का मूल संदेश यह दिखाई देता है कि यमन पर सैन्य दबाव बढ़ाया जाएगा तो जवाब केवल यमन के भीतर सीमित नहीं रहेगा। सऊदी सैन्य ठिकानों, एयरबेस और रणनीतिक आर्थिक प्रतिष्ठानों तक हमला पहुँचाने की क्षमता दिखाकर हूती नेतृत्व सऊदी अरब पर सैन्य और राजनीतिक दबाव बढ़ाने की कोशिश कर रहा है।

इसका एक दूसरा पहलू भी है। लंबे समय से चले आ रहे युद्ध में यमन के बड़े हिस्से ने भारी मानवीय और आर्थिक नुकसान झेला है। इसलिए यमनी पक्ष अपने सैन्य अभियान को विदेशी हस्तक्षेप और सऊदी नेतृत्व वाले सैन्य दबाव के खिलाफ प्रतिरोध के रूप में प्रस्तुत करता है।

Exit mobile version