“होर्मुज़ जलडमरूमध्य” निश्चित रूप से पूरी तरह ईरान के नियंत्रण में है: ब्रिगेडियर फदवी
ईरान ने रणनीतिक रूप से बेहद महत्वपूर्ण होर्मुज़ जलडमरूमध्य को लेकर एक बार फिर कड़ा रुख अपनाया है। ईरान के इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) के कमांडर-इन-चीफ के सलाहकारों के समूह के प्रमुख, ब्रिगेडियर जनरल अली फदवी ने दावा किया है कि होर्मुज़ जलडमरूमध्य पर ईरान का “निश्चित रूप से नियंत्रण” है। ईरानी टेलीविजन ने फदवी के हवाले से यह जानकारी दी।
फदवी ने दावा किया कि पहली बार कोई भी अमेरिकी जहाज फारस की खाड़ी, होर्मुज़ जलडमरूमध्य, ओमान सागर और यहां तक कि उत्तरी हिंद महासागर में मौजूद नहीं है। उनके मुताबिक, अमेरिकी सेनाएं ईरानी सीमा से 1,000 किलोमीटर से भी अधिक दूर चली गई हैं।
ईरानी अधिकारी ने इस स्थिति का श्रेय ईरान की सैन्य क्षमता और रिवोल्यूशनरी गार्ड की नौसैनिक शक्ति को दिया। उन्होंने कहा कि ईरान की बढ़ती सैन्य ताकत के कारण अमेरिकी नौसैनिक बलों को क्षेत्र से पीछे हटना पड़ा है।
फदवी ने अमेरिका को सीधी चेतावनी देते हुए कहा कि अमेरिकी जहाज ईरानी बलों के हाथों “100 प्रतिशत नुकसान के जोखिम” में हैं। उनके इस बयान से यह संकेत मिलता है कि ईरान फारस की खाड़ी और होर्मुज़ जलडमरूमध्य में अमेरिकी सैन्य मौजूदगी को गंभीर चुनौती के रूप में देख रहा है।
होर्मुज़ को लेकर ईरान का नया सुरक्षा प्रस्ताव
इसी बीच, ईरानी संसद की राष्ट्रीय सुरक्षा और विदेश नीति समिति के प्रवक्ता हसन क़शक़ावी ने भी होर्मुज़ जलडमरूमध्य को लेकर महत्वपूर्ण बयान दिया है।
क़शक़ावी ने शुक्रवार को कहा कि होर्मुज़ जलडमरूमध्य की सुरक्षा से संबंधित प्रस्ताव उन सभी मौजूदा कानूनों को निरस्त करता है, जो इस नए प्रावधान के विपरीत हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि जलडमरूमध्य का प्रशासन और प्रबंधन ईरान के राष्ट्रीय सुरक्षा और राष्ट्रीय हितों को ध्यान में रखकर किया जाएगा। उनके बयान से संकेत मिलता है कि ईरान होर्मुज़ जलडमरूमध्य में जहाजों की आवाजाही और सुरक्षा व्यवस्था को लेकर अपने अधिकार और नियंत्रण को और मजबूत करने की दिशा में आगे बढ़ रहा है।
होर्मुज़ जलडमरूमध्य क्यों महत्वपूर्ण है?
होर्मुज़ जलडमरूमध्य दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण समुद्री मार्गों में से एक है। यह फारस की खाड़ी को ओमान की खाड़ी और अरब सागर से जोड़ता है। दुनिया के तेल और ऊर्जा व्यापार का एक बड़ा हिस्सा इसी समुद्री मार्ग से होकर गुज़रता है। इसी वजह से होर्मुज़ में किसी भी तरह का सैन्य तनाव या जहाजों की आवाजाही में रुकावट अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा बाजार और कच्चे तेल की कीमतों पर व्यापक असर डाल सकती है।
ईरान लंबे समय से इस क्षेत्र में अपनी नौसैनिक और सैन्य क्षमता का प्रदर्शन करता रहा है। वहीं, अमेरिका भी क्षेत्र में अपने सहयोगी देशों और समुद्री व्यापार मार्गों की सुरक्षा के लिए लंबे समय से नौसैनिक मौजूदगी बनाए रखता आया है। ऐसे में अली फदवी का यह दावा कि होर्मुज़ जलडमरूमध्य पूरी तरह ईरान के नियंत्रण में है और अमेरिकी जहाज क्षेत्र से दूर हो गए हैं, क्षेत्र में जारी ईरान-अमेरिका तनाव के बीच एक महत्वपूर्ण बयान माना जा रहा है।

