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जो बाइडेन इस्राईल के साथ नई शुरुआत करना चाहते हैं

सीएनएन : जो बाइडेन के राष्ट्रपति पद ग्रहण करने के एक महीने के बाद तक उनके द्वारा इस्राईली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू को कॉल करना बाकी है,

पिछले हफ्ते व्हाइट हाउस के प्रेस सचिव जेन साकी ने कहा था कि जल्द ही इस्राईली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू को कॉल की जाएगी।

ग़ौरतलब है कि जो बाइडेन द्वारा कॉल करने में देरी किया जाना कुछ अटपटा लगता है क्यों कि वे बरसों से नेतन्याहू को जानते हैं, और अपनी एक पोस्ट में एक बार लिख भी चुके हैं कि मै आपसे सहमत नहीं हूं लेकिन आपसे प्यार करता हूं।
ऐसा प्रतीत हो रहा है कि ट्रम्प के शासनकाल के दौरान इस्राईल के साथ बनाई गई नीतियों मे दुबारा वापसी नहीं की जाएगी,हालांकि इस्राईल मिडिल ईस्ट में अमेरिका का सबसे करीबी सहयोगी रहेगा,

ऐसा माना जा रहा है कि जो बाइडेन अपने पूर्ववर्ती के खिलाफ इस्राईल के समर्थक तो हो सकते है लेकिन ये जरूरी नहीं कि वह नेतन्याहू के समर्थक भी हों।

कहा जा रहा है कि बाइडेन के ऊपर कई घरेलू मुद्दों का दबाव है, वे सदी के सबसे खराब स्वास्थ्य संकट से निपटने की कोशिशें कर रहे हैं,अर्थव्यवस्था को मजबूत कर रहे हैं, और अपने राष्ट्र को बेहतर बनाने की कोशिश में लगे हुए हैं।
बाइडेन द्वारा नेतन्याहू को कॉल ना किया जाना प्राथमिकताओं में बदलाव की ओर भी इशारा करता है।

गौरतलब है कि फ्रेंकलिन रूजवेल्ट के बाद से जो बाईडेन राष्ट्रपति के रूप में ना सिर्फ सबसे चुनौतीपूर्ण काम कर रहे हैं, बल्कि वह ईरान के अपवाद के साथ मिडिल ईस्ट के विषय में भी विचार के रहे हैं जो चीन और एशिया की तुलना में एक चिंता का विषय है।

जो बाईडेन बराक ओबामा की तरह नहीं है बल्कि वो पूर्व राष्ट्रपति बिल क्लिंटन की तरह है जिन्होंने इस्राईल का पूर्ण समर्थन किया।

आपको बता दें कि 1973 में पहली इस्राईल यात्रा के बाद से ही जो बाईडेन इस्राईल के समर्थक रहे इसके साथ ही उन्होंने वहां की सैन्य शक्ति को बनाए रखने की भी कोशिशें की ओर उप राष्ट्रपति के रूप में इस्राईल को 38 बिलियन डॉलर की बहु-वर्षीय सुरक्षा पैकेज देने में भी मदद की।

इसमें कोई शक नहीं कि बाईडेन नेतन्याहू के साथ कोई तनाव पैदा करना नहीं चाहते बल्कि वे इस बारे में विचार कर रहे है कि ईरानी परमाणु विस्तार का प्रबंधन कैसे किया जाए, मुमकिन है कि वे ईरान के परमाणु कार्यक्रम के विषय में इस्राईल की मुश्किलों को समझने की और उसका साथ देने की कोशिश करेंगे।

लेकिन अगर नेतन्याहू ने ईरान के पुनर्निर्माण के लिए की गई कोशिशों को कमज़ोर करने की कोशिश की तो बाइडेन पीछे हट जाएंगे, क्यों कि वे अमेरिका और इस्राईल के बीच एक मजबूत सम्बन्ध रखना चाहते हैं। हालांकि उनका समर्थन इस्राईल के लिए है न कि नेतन्याहू के लिए।

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