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लिंडसे ग्राहम की हसरतें नाकाम, ईरान के पतन की इच्छा में दम तोड़

वॉशिंगटन: अमेरिका के प्रमुख रिपब्लिकन नेता और दक्षिण कैरोलिना से सीनेटर लिंडसे ग्राहम का 71 वर्ष की उम्र में निधन हो गया। उनके कार्यालय ने बताया कि शनिवार रात एक संक्षिप्त और अचानक बीमारी के बाद उनका निधन हुआ।

ग्राहम अमेरिकी राजनीति में लंबे समय तक सक्रिय रहे और विदेश नीति, सुरक्षा तथा सैन्य मामलों पर अपने कड़े रुख के लिए पहचाने जाते थे।

लिंडसे ग्राहम को वॉशिंगटन के उन नेताओं में गिना जाता था जो ईरान के खिलाफ कठोर कार्रवाई की वकालत करते रहे। उन्होंने कई बार ईरान के परमाणु कार्यक्रम और क्षेत्रीय नीतियों को लेकर अमेरिका से सख्त कदम उठाने की मांग की थी।

ग्राहम का मानना था कि ईरान पर दबाव बनाने के लिए आर्थिक प्रतिबंधों के साथ-साथ सैन्य विकल्पों को भी खुला रखना चाहिए। उन्होंने कई मौकों पर ईरान की तेल और ऊर्जा सुविधाओं को निशाना बनाने जैसी रणनीतियों का समर्थन किया था।

अमेरिकी सीनेटर के तौर पर ग्राहम ने कई ऐसे प्रस्तावों और नीतियों का समर्थन किया जिनका उद्देश्य ईरान पर अंतरराष्ट्रीय दबाव बढ़ाना था। वह उन अमेरिकी सांसदों में शामिल थे जो ईरान के खिलाफ कड़े प्रतिबंधों और सहयोगी देशों पर दबाव बनाने की नीति के समर्थक रहे।

शुरुआत में ग्राहम और डोनाल्ड ट्रंप के बीच राजनीतिक मतभेद रहे, लेकिन बाद में वह ट्रंप के प्रमुख समर्थकों में शामिल हो गए। अमेरिकी विदेश नीति, रूस, ईरान और अन्य अंतरराष्ट्रीय मुद्दों पर उनकी राय अक्सर चर्चा में रहती थी।

लिंडसे ग्राहम ने अमेरिकी प्रतिनिधि सभा से अपने राजनीतिक सफर की शुरुआत की और बाद में सीनेट पहुंचे। दो दशकों से अधिक समय तक उन्होंने अमेरिकी राजनीति में प्रभावशाली भूमिका निभाई।

उनकी मौत के बाद अमेरिकी राजनीति में एक ऐसे नेता का अध्याय समाप्त हो गया जो अपनी आक्रामक विदेश नीति और राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़े मुद्दों पर स्पष्ट और कड़े विचारों के लिए जाना जाता था।

 

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