Site icon ISCPress

भारत-चीन पर बढ़ेगा दबाव, रूसी तेल पर अमेरिकी टैरिफ में बदलाव

नई दिल्ली: रूस से तेल खरीदने वाले देशों पर सख्त कार्रवाई की अमेरिकी योजना में बड़ा बदलाव देखने को मिला है। पहले जहां अमेरिकी सीनेटर लिंडसे ग्राहम ने रूस से तेल आयात करने वाले देशों पर 500% तक टैरिफ लगाने का प्रस्ताव रखा था, वहीं अब संशोधित बिल में इस सीमा को घटाकर 100% कर दिया गया है।

संशोधित प्रस्ताव के अनुसार, प्रतिबंध सभी देशों पर लागू नहीं होंगे। यह बिल केवल रूस से कच्चा तेल खरीदने वाले पांच सबसे बड़े आयातक देशों पर केंद्रित रहेगा। इसका उद्देश्य रूस की ऊर्जा आय से होने वाली कमाई पर दबाव बनाना बताया जा रहा है।

रूस से सबसे अधिक कच्चा तेल खरीदने वाले देशों में भारत और चीन प्रमुख हैं। यदि यह प्रस्ताव लागू होता है, तो दोनों देशों के व्यापार और ऊर्जा आयात पर इसका असर पड़ सकता है।

बिल में ऐसे देशों के लिए राहत का भी प्रावधान रखा गया है, जो अपनी कुल गैस जरूरत का 15% से कम हिस्सा रूस से आयात करते हैं और लगातार रूसी ऊर्जा पर निर्भरता कम कर रहे हैं। ऐसे देशों को संभावित प्रतिबंधों से छूट मिल सकती है।

संशोधित बिल के तहत अमेरिकी राष्ट्रपति को विशेष अधिकार दिए जाएंगे। यदि किसी देश को प्रतिबंधों से छूट देना राष्ट्रीय हित में माना जाता है, तो राष्ट्रपति टैरिफ या अन्य प्रतिबंधों को अस्थायी या स्थायी रूप से हटाने का फैसला ले सकते हैं।

रूस-यूक्रेन युद्ध के बाद अमेरिका और उसके सहयोगी देशों ने रूस की ऊर्जा आय को सीमित करने के लिए कई आर्थिक प्रतिबंध लगाए हैं। इसी कड़ी में रूस से तेल खरीदने वाले देशों पर अतिरिक्त टैरिफ लगाने का प्रस्ताव सामने आया था। अब 500% की जगह 100% टैरिफ का संशोधित प्रस्ताव लाकर अमेरिका ने अपने रुख में कुछ नरमी दिखाई है। हालांकि, यदि यह कानून बनता है तो भारत और चीन जैसे बड़े खरीदारों पर इसका प्रभाव पड़ सकता है।

Exit mobile version