लेबनान सरकार इस्राईली आक्रामकता के ख़िलाफ़ कार्रवाई करे, वरना हमारे सब्र का बाँध टूट जाएगा: हिज़्बुल्लाह
लेबनानी प्रतिरोध आंदोलन हिज़्बुल्लाह ने एक कड़े बयान में कहा है कि यदि लेबनान सरकार इस्राईल की लगातार सैन्य आक्रामकता और युद्ध-विराम उल्लंघनों के विरुद्ध प्रभावी कदम नहीं उठाती, तो दक्षिणी लेबनान के लोगों के सब्र का बाँध टूट सकता है। संगठन ने आरोप लगाया कि बेरूत सरकार ने इस्राईली हमलों के सामने चुप्पी और निष्क्रियता का रास्ता अपनाकर सीमावर्ती इलाक़ों के नागरिकों को असुरक्षित और बिना किसी प्रभावी सुरक्षा के छोड़ दिया है।
हिज़्बुल्लाह ने अपने बयान में कहा कि पिछले कई महीनों से इस्राईल दक्षिणी लेबनान में लगातार हवाई हमले, विस्फोट और सैन्य कार्रवाई कर रहा है, जिनसे नागरिक आबादी, घरों और बुनियादी ढाँचे को भारी नुकसान पहुँचा है। इसके बावजूद सरकार की ओर से कोई ठोस प्रतिक्रिया सामने नहीं आई। संगठन का कहना है कि किसी भी राष्ट्र की संप्रभुता और नागरिकों की सुरक्षा की ज़िम्मेदारी सरकार की होती है, लेकिन मौजूदा परिस्थितियों में यह ज़िम्मेदारी पूरी होती दिखाई नहीं दे रही।
बयान में आगे कहा गया कि लेबनानी सरकार ने अपनी चुप्पी, अनुपस्थिति और तथाकथित “रूपरेखा समझौते” (फ़्रेमवर्क एग्रीमेंट) पर हस्ताक्षर करके इस्राईल के कब्ज़े और उसकी आक्रामक कार्रवाइयों को अप्रत्यक्ष रूप से वैधता प्रदान की है। हिज़्बुल्लाह ने सवाल उठाया कि जब दक्षिणी लेबनान में लगातार विस्फोट हो रहे हैं और आम नागरिक भय के साये में जी रहे हैं, तब सरकारी अधिकारी इन घटनाओं पर प्रभावी प्रतिक्रिया देने से क्यों बच रहे हैं। संगठन ने चेतावनी दी कि जनता के धैर्य की भी एक सीमा होती है और यदि आक्रमण जारी रहे तथा सरकार निष्क्रिय बनी रही, तो हालात और गंभीर हो सकते हैं।
क़िला अल-शक़ीफ़ में हुए विस्फोट युद्ध-विराम का गंभीर उल्लंघन: राष्ट्रपति जोसफ़ औन
लेबनान के राष्ट्रपति जोसफ़ औन ने आज तड़के क़िला अल-शक़ीफ़ क्षेत्र में हुए भीषण विस्फोटों की कड़ी निंदा करते हुए कहा कि इस्राईल की यह कार्रवाई युद्ध-विराम प्रतिबद्धताओं का खुला और गंभीर उल्लंघन है। उन्होंने कहा कि इस प्रकार के हमले न केवल लेबनान की संप्रभुता का उल्लंघन करते हैं, बल्कि क्षेत्र में शांति और स्थिरता स्थापित करने के सभी प्रयासों को भी कमज़ोर करते हैं।
राष्ट्रपति औन ने कहा कि रोम में प्रस्तावित वार्ता से ठीक पहले इस्राईल द्वारा किए गए ये हमले स्पष्ट रूप से एक नकारात्मक संदेश हैं, जिनका उद्देश्य कूटनीतिक प्रयासों को प्रभावित करना और क्षेत्र में तनाव बढ़ाना प्रतीत होता है। उन्होंने अंतरराष्ट्रीय समुदाय से अपील की कि वह इस्राईल पर युद्ध-विराम समझौते का पालन करने और लेबनान के विरुद्ध सैन्य आक्रामकता रोकने के लिए प्रभावी दबाव बनाए।
उन्होंने इस बात पर ज़ोर दिया कि यदि इस्राईल की ओर से ऐसे हमलों पर रोक नहीं लगाई गई, तो इससे पूरे क्षेत्र में अस्थिरता और संघर्ष का ख़तरा और बढ़ सकता है। राष्ट्रपति ने कहा कि लेबनान अपनी संप्रभुता, सुरक्षा और नागरिकों की रक्षा के अधिकार से पीछे नहीं हटेगा तथा अंतरराष्ट्रीय समुदाय को भी अपनी ज़िम्मेदारियाँ निभानी चाहिए।

