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ड्रोन हमले के बाद सऊदी ने अपनी ईस्ट-वेस्ट तेल पाइपलाइन बंद की, इसी से रोज़ाना 50 लाख बैरल तेल भेजता था

ड्रोन हमले के बाद सऊदी ने अपनी ईस्ट-वेस्ट तेल पाइपलाइन बंद की, इसी से रोज़ाना 50 लाख बैरल तेल भेजता था

सऊदी अरब ने ड्रोन हमले के बाद अपनी ईस्ट-वेस्ट तेल पाइपलाइन को अस्थायी रूप से बंद कर दिया है। गुरुवार को हुए कई ड्रोन हमलों में पाइपलाइन से जुड़े पंपिंग स्टेशनों में आग लग गई, जिसमें कुछ लोग घायल हुए। यह पाइपलाइन सऊदी के लिए बेहद महत्वपूर्ण है, क्योंकि होर्मुज स्ट्रेट बंद होने के बाद इसी के जरिए रोजाना क़रीब 50 लाख बैरल तेल यानबू बंदरगाह तक भेजा जा रहा था।

सऊदी ऊर्जा मंत्रालय के मुताबिक, पाइपलाइन पर कई हमले हुए हैं। अधिकारियों की टीमें नुक़सान का आकलन करने और पाइपलाइन की सुरक्षा सुनिश्चित करने में जुटी हैं। फिलहाल यह स्पष्ट नहीं है कि पाइपलाइन को कितना नुकसान पहुंचा है और इसे दोबारा कब शुरू किया जाएगा।

अमेरिकी अधिकारियों के अनुसार, हमलावरों ने पाइपलाइन के पास बने पंपिंग स्टेशनों को निशाना बनाया। सैटेलाइट तस्वीरों में एक स्टेशन पर आग से भारी नुकसान और दूसरे स्थान पर काला धुआं दिखाई दिया। पंपिंग स्टेशन पाइपलाइन में तेल को आगे भेजने के लिए जरूरी होते हैं।

सऊदी विदेश मंत्रालय ने दावा किया है कि, रियाद और मदीना के इलाकों में हुए हमलों में कई ड्रोन शामिल थे और ये इराक़ से आए थे। सऊदी ने कहा कि इराक़ी प्रधानमंत्री की अपील के बाद उसने फिलहाल जवाबी कार्रवाई नहीं करने का फैसला किया है। रियाद ने इराक़ से अपनी ज़मीन और हवाई क्षेत्र से होने वाले ऐसे हमलों को रोकने के लिए कार्रवाई करने की मांग की है।

होर्मुज बंद होने से बढ़ी पाइपलाइन की अहमियत

सऊदी अरब का ज्यादातर तेल देश के पूर्वी हिस्से में निकलता है। सामान्य परिस्थितियों में इसे समुद्री रास्ते से भेजा जाता है, लेकिन फारस की खाड़ी से बाहर निकलने के लिए जहाजों को होर्मुज स्ट्रेट से गुजरना पड़ता है। ईरान युद्ध के कारण होर्मुज बंद होने के बाद सऊदी ने ईस्ट-वेस्ट पाइपलाइन का इस्तेमाल बढ़ाया।

यह पाइपलाइन पूर्वी सऊदी अरब से तेल को सीधे पश्चिमी तट पर स्थित यानबू बंदरगाह तक पहुंचाती है। वहां से तेल जहाजों के जरिए अंतरराष्ट्रीय बाजारों में भेजा जा सकता है। ऐसे में पाइपलाइन का बंद होना वैश्विक तेल आपूर्ति के लिए चिंता बढ़ा सकता है।

लाल सागर पर भी बढ़ा खतरा

होर्मुज के बाद लाल सागर का समुद्री रास्ता भी जोखिम में दिखाई दे रहा है। यमन के हूती विद्रोहियों ने बाब अल-मंदेब इलाके पर नियंत्रण का दावा किया है और सऊदी जहाजों को इस रास्ते से गुजरने से रोकने की चेतावनी दी है। बाब अल-मंदेब एशिया और यूरोप के बीच समुद्री व्यापार का अहम मार्ग है। यहां तनाव बढ़ने से तेल समेत अन्य सामानों की वैश्विक आपूर्ति और परिवहन लागत पर भी असर पड़ सकता है।

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