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इराक़ के नुजबा समूह ने तेल राजस्व पर जारी अमेरिकी वर्चस्व की आलोचना की

इराक़ के नुजबा समूह ने तेल राजस्व पर जारी अमेरिकी वर्चस्व की आलोचना की

इस्लामी प्रतिरोध आंदोलन नुजबा के महासचिव शेख़ अकरम अल-क़ाबी ने इराक़ के तेल राजस्व पर अमेरिका के जारी वर्चस्व की कड़ी आलोचना की है। उन्होंने इस स्थिति को इराक़ की राष्ट्रीय संप्रभुता का स्पष्ट उल्लंघन बताते हुए तेल की बिक्री के लिए स्वतंत्र तंत्र स्थापित करने और तेल की क़ीमत का भुगतान सीधे इराक़ी सरकार को प्राप्त होने की मांग की है।

फ़ार्स न्यूज़ एजेंसी के अंतरराष्ट्रीय समूह के अनुसार, नुजबा आंदोलन के महासचिव शेख़ अकरम अल-काबी ने कहा कि देश के महत्वपूर्ण और निर्णायक मुद्दों पर कुछ लोग जनता के सामने जो तर्क पेश करते हैं, उनका उद्देश्य इराक़ को अमेरिकी “बुराई की धुरी” के सामने झुका देना है। विशेष रूप से हशद अल-शाबी और प्रतिरोध के संबंध में अमेरिकी राष्ट्रपति के निर्णयों को मानने के पीछे भी यही तर्क दिया जा रहा है।

अल-काबी ने कहा कि इन लोगों का कहना है कि इराक़ के तेल की बिक्री से होने वाला राजस्व अमेरिका के माध्यम से प्राप्त होता है और यदि इराक़ अमेरिका के साथ टकराव में जाता है, तो अमेरिका इराक़ के बजट की रक़म के भुगतान में बाधा डाल सकता है। उन्होंने इसे “समय की अजीब विडंबना” बताया।

उन्होंने सवाल किया,

“एक संप्रभु देश कैसे यह स्वीकार कर सकता है कि, उसकी अर्थव्यवस्था और उसकी संपत्ति को एक अपराधी, लुटेरे और घमंडी के हाथों बंधक बना दिया जाए?”

अल-काबी ने कहा कि यदि यही एकमात्र तर्क है, तो देश की शक्ति के केंद्रों को कमजोर करने, अपनी संप्रभुता से पीछे हटने और उसे अमेरिकी-इस्राईली ताक़तों के हाथों गिरवी रखने के बजाय राष्ट्रीय हित और राष्ट्रीय सम्मान की रक्षा करना अधिक उचित होता। उन्होंने कहा कि इराक़ को इस घृणित संरक्षणवादी व्यवस्था से मुक्त कराने का प्रयास किया जाना चाहिए, जिसने देश की क्षमताओं पर अपना प्रभुत्व स्थापित कर रखा है और उसके संसाधनों पर नियंत्रण हासिल कर लिया है।

उन्होंने आगे कहा कि,

इराक़ के लिए तेल बेचने के माध्यमों में विविधता लाना और अमेरिका के एकाधिकार को रोकना बेहतर क़दम होता। तेल की बिक्री की रकम सीधे खरीदारों से प्राप्त की जानी चाहिए, ताकि यह धन उस “लुटेरे संरक्षक” के हाथों में न जाए, जिसने कथित तौर पर अनुचित तरीके से और बलपूर्वक खुद को इस भूमिका में स्थापित कर रखा है।

इस प्रमुख प्रतिरोध नेता ने यह भी कहा कि इराक़ संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के अध्याय 7 (Chapter VII) की पाबंदियों से बाहर निकल चुका है और अब उसे अपने तेल की बिक्री के लिए पक्षों तथा तंत्र का निर्धारण करने की पूरी स्वतंत्रता प्राप्त है।

उन्होंने कहा कि अमेरिकी सरकार के विदेश मंत्री के उस बयान पर चुप रहना शर्मनाक है, जिसमें उन्होंने कहा था कि “इराक़ में निवेश अमेरिकी राष्ट्रीय सुरक्षा का हिस्सा माना जाता है।”

अल-काबी के अनुसार, यह बयान इस बात की पुष्टि करता है कि, इराक़ में अमेरिका की “दुर्भावनापूर्ण परियोजना” का मुख्य उद्देश्य उन संसाधनों की चोरी और लूट है, जिसे “निवेश” का नाम दिया जा रहा है।
अंत में उन्होंने जोर देकर कहा कि इन कार्रवाइयों का मुकाबला करना इराक़ी प्रतिरोध की सबसे महत्वपूर्ण जिम्मेदारियों में से एक है।

उन्होंने कहा:
“हम इराक के संसाधनों और उसके लोगों की आजीविका की चोरी और लूट के सामने कभी चुप नहीं रहेंगे, चाहे यह किसी भी रूप, नाम या शीर्षक के तहत क्यों न की जाए।”

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