लेबनान में युद्ध समाप्त कराने के लिए ईरान पूरी गंभीरता से प्रयास कर रहा है: क़ालीबाफ़
ईरान की संसद के अध्यक्ष मोहम्मद बाक़िर क़ालिबाफ़ ने लेबनान के संसद अध्यक्ष के साथ टेलीफोन पर हुई बातचीत में कहा कि पिछले सप्ताह स्विट्ज़रलैंड में हुई वार्ता में सबसे महत्वपूर्ण मुद्दों में लेबनान में युद्ध का अंत, उसकी संप्रभुता तथा क्षेत्रीय अखंडता की रक्षा शामिल थी।
उन्होंने बताया कि यह विषय ईरान और अमेरिका के बीच हुए इस्लामाबाद समझौते के प्रथम अनुच्छेद का एक प्रमुख भाग है। स्विट्ज़रलैंड वार्ता के दौरान ईरानी प्रतिनिधिमंडल ने इस अनुच्छेद के कथित उल्लंघनों पर गंभीर आपत्ति दर्ज कराई, जिसके बाद ईरान, अमेरिका और लेबनान के संयुक्त प्रतिनिधियों की एक “संघर्ष नियंत्रण इकाई” (Conflict Control Unit) गठित करने पर सहमति बनी। यह इकाई लेबनान में समझौते के इस प्रावधान के क्रियान्वयन और निगरानी की जिम्मेदारी निभाएगी।
क़ालिबाफ़ ने कहा कि ईरान का उद्देश्य लेबनान में जारी युद्ध को समाप्त कराना, विस्थापित नागरिकों की सुरक्षित घर वापसी सुनिश्चित करना, इस्राईली क़ब्ज़े का अंत करना और लेबनान की भूमि से इस्राईली सेना की पूर्ण वापसी कराना है। उन्होंने कहा कि तेहरान इन लक्ष्यों को पूरा करने के लिए पूरी गंभीरता से प्रयास कर रहा है।
बातचीत के दौरान लेबनान के संसद अध्यक्ष ने ईरान की पहल का स्वागत करते हुए कहा कि, स्विट्ज़रलैंड में उठाए गए क़दम लेबनानी जनता के हित में हैं। हालांकि उन्होंने आरोप लगाया कि इस्लामाबाद समझौते के अंतर्गत लेबनान की संप्रभुता और क्षेत्रीय अखंडता की बहाली के प्रावधानों को दूसरे रास्तों से निष्प्रभावी करने की कोशिश कर रहा है।
उन्होंने आगे कहा कि लेबनान और इस्राईल के बीच प्रस्तावित वॉशिंगटन समझौता एक “साज़िश और फितना” है। इस संदर्भ में उन्होंने इमाम अली का कथन उद्धृत करते हुए कहा, “फ़ितना हत्या से भी अधिक घातक होता है।”

