ग़ाज़ा: इस्राईल के वहशियाना हमले के 1000 दिन पूरे होने के बाद, फ़िलिस्तीनियों का भविष्य अब भी अनिश्चित
ग़ाज़ा पट्टी में इस्राईली सैन्य अभियान को 1000 दिन पूरे हो गए हैं। इस दौरान हज़ारों फ़िलिस्तीनी मारे गए, लाखों लोग बेघर हुए, बड़े पैमाने पर तबाही हुई और पूरा इलाका गंभीर मानवीय संकट का शिकार बना रहा। हालांकि अक्टूबर 2025 में युद्धविराम लागू हुआ, लेकिन ग़ाज़ा में सैन्य कार्रवाइयाँ, सीमित हमले, कब्ज़े का विस्तार, राहत सामग्री में रुकावटें और राजनीतिक गतिरोध जारी रहे। इन 1000 दिनों में सैन्य, कूटनीतिक, कानूनी और मानवीय स्तर पर कई महत्वपूर्ण घटनाएँ हुईं, लेकिन युद्ध का स्थायी अंत और पुनर्निर्माण अब भी अनिश्चित बना हुआ है।
गुरुवार को ग़ाज़ा में इस्राईली सैन्य अभियान के 1000 दिन पूरे हुए। इस लंबे दौर में ग़ाज़ा अभूतपूर्व मानवीय त्रासदी, बड़े पैमाने पर विस्थापन, बुनियादी ढाँचे की तबाही, भोजन और दवाइयों की भारी कमी तथा लगातार सैन्य तनाव का केंद्र बना रहा।
संयुक्त राष्ट्र के अनुमानों के अनुसार, अक्टूबर 2023 से अब तक 73,000 से अधिक फ़िलिस्तीनी मारे जा चुके हैं, लगभग 1 लाख 73 हज़ार 500 लोग घायल हुए हैं और लाखों लोग बेघर हो चुके हैं। ग़ाज़ा के पुनर्निर्माण की अनुमानित लागत लगभग 70 अरब डॉलर बताई गई है।
हालांकि 10 अक्टूबर 2025 को युद्धविराम लागू हुआ, लेकिन ग़ाज़ा में इस्राईली सैन्य अभियान पूरी तरह बंद नहीं हुए। फ़िलिस्तीनी अधिकारियों के अनुसार, युद्धविराम के बाद भी 1000 से अधिक फ़िलिस्तीनी मारे गए और हज़ारों घायल हुए। इस्राईल ने ग़ाज़ा के लगभग 70 प्रतिशत हिस्से पर अपना सैन्य नियंत्रण बढ़ाने की घोषणा की, जबकि बड़ी संख्या में फ़िलिस्तीनी सीमित इलाकों में रहने को मजबूर हैं।
1000 दिनों की प्रमुख घटनाएँ
वर्ष 2023
7 अक्टूबर: हमास ने “ऑपरेशन अल-अक्सा” के नाम से इस्राईल पर बड़ा हमला किया। हज़ारों रॉकेट दागे गए और इस्राईली क्षेत्रों में घुसपैठ की गई। इस्राईली अधिकारियों के अनुसार लगभग 1200 लोग मारे गए, हज़ारों घायल हुए और कई लोगों को बंधक बनाया गया। इसके जवाब में इस्राईल ने “आयरन स्वॉर्ड्स” नाम से सैन्य अभियान शुरू करते हुए ग़ज़ा की पूरी घेराबंदी कर दी।
13 अक्टूबर: इस्राईल ने उत्तरी ग़ाज़ा के नागरिकों को इलाका खाली करने का आदेश दिया।
27 अक्टूबर: इस्राईली सेना ने उत्तरी ग़ाज़ा में जमीनी अभियान शुरू किया, जो बाद में मध्य और दक्षिणी ग़ाज़ा तक फैल गया।
नवंबर: नेतज़ारिम कॉरिडोर बनाया गया, जिससे उत्तरी और दक्षिणी ग़ाज़ा को अलग कर दिया गया। संयुक्त राष्ट्र की फ़िलिस्तीनी शरणार्थी एजेंसी ने उत्तरी ग़ाज़ा में अकाल की आशंका जताई।
24 नवंबर: क़तर, मिस्र और अमेरिका की मध्यस्थता से अस्थायी युद्ध-विराम लागू हुआ। बंदियों की अदला-बदली हुई और सीमित मानवीय सहायता पहुँचाई गई।
3 दिसंबर: ख़ान यूनिस में इस्राईली जमीनी अभियान शुरू हुआ।
29 दिसंबर: दक्षिण अफ्रीका ने इस्राईल के खिलाफ अंतरराष्ट्रीय न्यायालय (आईसीजे) में नरसंहार का मामला दायर किया, जिसमें बाद में कई अन्य देश भी शामिल हुए।
वर्ष 2024
3 जनवरी: बेरूत में हुए हमले में हमास के नेता सालेह अल-अरूरी मारे गए।
25 मार्च: संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद ने पहली बार ग़ाज़ा में तत्काल युद्धविराम का प्रस्ताव पारित किया।
6 मई: इस्राईल ने रफ़ह में बड़ा सैन्य अभियान शुरू किया और बाद में रफ़ह क्रॉसिंग पर क़ब्ज़ा कर लिया।
31 मई: अमेरिकी राष्ट्रपति जो बाइडेन ने तीन चरणों वाले युद्धविराम प्रस्ताव की घोषणा की, लेकिन बाद में वार्ता ठप हो गई।
8 जून: नुसैरात शरणार्थी शिविर में इस्राईली कार्रवाई के दौरान 274 फ़िलिस्तीनी मारे गए, जिनमें बड़ी संख्या महिलाओं और बच्चों की थी।
25 जून: आईपीसी की रिपोर्ट में कहा गया कि ग़ाज़ा की 95 प्रतिशत आबादी खाद्य असुरक्षा का सामना कर रही है।
31 जुलाई: तेहरान में हुए हमले में हमास प्रमुख इस्माईल हानिये मारे गए।
6 अगस्त: यह्या सिनवार को हमास के राजनीतिक ब्यूरो का प्रमुख चुना गया।
अक्टूबर: जबालिया शिविर में इस्राईली अभियान शुरू हुआ। बाद में इस्राईल ने रफ़ाह में यह्या सिनवार के मारे जाने का दावा किया।
वर्ष 2025
19 जनवरी: हमास और इस्राईल के बीच तीन चरणों वाला युद्धविराम लागू हुआ।
2 मार्च: इस्राईल ने ग़ाज़ा जाने वाले सभी राहत मार्ग बंद कर दिए।
18 मार्च: इस्राईल ने युद्धविराम समाप्त कर दोबारा सैन्य अभियान शुरू कर दिया।
अप्रैल से सितंबर: रफ़ाह, मोराग कॉरिडोर और ग़ाज़ा शहर में कई नए सैन्य अभियान चलाए गए। अमेरिकी दूत स्टीव विटकॉफ की ओर से कई युद्धविराम प्रस्ताव भी आए, लेकिन कोई स्थायी सफलता नहीं मिली।
8 अगस्त: इस्राईली सरकार ने ग़ज़ा पर चरणबद्ध तरीके से नियंत्रण बढ़ाने की योजना को मंजूरी दी।
22 अगस्त: आईपीसी ने ग़ाज़ा शहर में आधिकारिक तौर पर अकाल घोषित किया।
29 सितंबर: अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ग़ाज़ा के लिए 20 सूत्रीय योजना पेश की, जिसमें युद्धविराम, बंधकों की रिहाई, हमास का निरस्त्रीकरण और नई प्रशासनिक व्यवस्था शामिल थी।
10 अक्टूबर: इस्राईल ने औपचारिक रूप से युद्धविराम लागू होने की घोषणा की, जबकि 13 अक्टूबर को बड़े पैमाने पर बंदियों की अदला-बदली पूरी हुई।
वर्ष 2026
14 जनवरी: युद्धविराम के दूसरे चरण की शुरुआत की घोषणा की गई, जिसमें पुनर्निर्माण, नई फ़िलिस्तीनी प्रशासनिक व्यवस्था और निरस्त्रीकरण से जुड़े कदम शामिल थे।
फ़रवरी: रफ़ाह क्रॉसिंग सीमित रूप से दोबारा खोली गई, लेकिन बाद में फिर बंद कर दी गई।
15 मई: इस्राईली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने स्वीकार किया कि ग़ाज़ा में इस्राईली सैन्य नियंत्रण का दायरा बढ़ाया गया है।
24 जून: नेतन्याहू ने कहा कि इस्राईली सेना ग़ाज़ा के लगभग 70 प्रतिशत हिस्से में मौजूद है।
1000 दिनों बाद ग़ाज़ा की स्थिति
युद्धविराम लागू होने के बावजूद ग़ाज़ा में बीच-बीच में हमले जारी हैं। फ़िलिस्तीनी स्वास्थ्य मंत्रालय के अनुसार, युद्धविराम के बाद भी 1000 से अधिक फ़िलिस्तीनी मारे जा चुके हैं और साढ़े तीन हज़ार से अधिक घायल हुए हैं।
संयुक्त राष्ट्र ने चेतावनी दी है कि इस्राईली सैन्य नियंत्रण बढ़ने से आम नागरिकों के लिए खतरे और बढ़ गए हैं। ग़ाज़ा के 20 लाख से अधिक फ़िलिस्तीनी अब भी बेघर हैं और अधिकांश लोग तंबुओं या तबाह इमारतों में रहने को मजबूर हैं।
राहत एजेंसियों का कहना है कि दवाइयों, खाद्य सामग्री, ईंधन और अन्य आवश्यक वस्तुओं की आपूर्ति अब भी गंभीर बाधाओं का सामना कर रही है। संयुक्त राष्ट्र के अनुसार कई अस्पताल अभी तक पूरी तरह चालू नहीं हो पाए हैं और राहत सामग्री की आपूर्ति भी कड़ी पाबंदियों के कारण प्रभावित है।
पुनर्निर्माण, युद्धविराम और राजनीतिक गतिरोध
ग़ाज़ा युद्धविराम समझौते के तहत नई फ़िलिस्तीनी प्रशासनिक व्यवस्था, पुनर्निर्माण, अंतरराष्ट्रीय स्थिरता बल की तैनाती और हमास के निरस्त्रीकरण जैसे मुद्दों पर अमल होना था, लेकिन इनमें कोई उल्लेखनीय प्रगति नहीं हो सकी। अमेरिका समर्थित “बोर्ड ऑफ पीस” भी अब तक कोई ठोस परिणाम नहीं दे पाया है।
उधर इस्राईल के भीतर भी राजनीतिक दबाव बढ़ता जा रहा है। विभिन्न सर्वेक्षणों के अनुसार प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू को सुरक्षा स्थिति, लंबे समय तक चले युद्ध और आंतरिक राजनीतिक मतभेदों के कारण भारी जन आलोचना का सामना करना पड़ रहा है।
मानवीय संकट अब भी जारी
अंतरराष्ट्रीय रेड क्रॉस समिति के क्षेत्रीय निदेशक निकोलस वॉन आर्क्स का कहना है कि ग़ाज़ा में सामान्य जीवन बहाल होने में अभी लंबा समय लगेगा। संयुक्त राष्ट्र के मानवीय मामलों के प्रमुख टॉम फ्लेचर के अनुसार राहत सामग्री की आपूर्ति अब भी कड़े प्रतिबंधों और जटिल प्रक्रियाओं से प्रभावित है।
ग़ाज़ा के निवासियों का कहना है कि युद्ध से पहले उनका जीवन सामान्य था, लेकिन अब भोजन, दवाइयाँ, आवास और बुनियादी सुविधाएँ भी उपलब्ध नहीं हैं। लगातार 1000 दिनों तक चले युद्ध के बाद ग़ाज़ा आज भी मलबे, विस्थापन, आर्थिक तबाही और अनिश्चित भविष्य की प्रतीक बना हुआ है।

