युद्ध की आंच भी न रोक सकी इमाम हुसैन के चाहने वालों का कारवाँ, अरबईन में करोड़ों ज़ायरीन पहुँचे कर्बला
दुनिया भर में बढ़ते तनाव, युद्ध की परिस्थितियों और सुरक्षा संबंधी चुनौतियों के बावजूद इस वर्ष भी अरबईन-ए-हुसैनी में आस्था का ऐसा अभूतपूर्व सैलाब उमड़ा जिसने पूरी दुनिया का ध्यान अपनी ओर आकर्षित कर लिया। इराकी सूत्रों के अनुसार, इस वर्ष 2 करोड़ 20 लाख से अधिक ज़ायरीन इमाम हुसैन (अ.) और हज़रत अबुल फ़ज़्ल अल-अब्बास (अ.) की बारगाह में हाज़िरी देने के लिए कर्बला पहुँचे।
इस महान आध्यात्मिक यात्रा के दौरान 16,000 इराकी और 2,500 ईरानी मौकिबों ने ज़ायरीन की पूरे समर्पण के साथ सेवा की। भोजन, पानी, विश्राम, चिकित्सा और अन्य आवश्यक सुविधाएँ उपलब्ध कराकर उन्होंने अरबईन की मेहमाननवाज़ी की परंपरा को जीवंत रखा।
दूसरी ओर, हज़रत अबुल फ़ज़्ल अल-अब्बास (अ.) के पवित्र रौज़े की ओर से जारी आँकड़ों में इस वर्ष 1 करोड़ 99 लाख 99 हज़ार 870 ज़ायरीन की उपस्थिति दर्ज की गई। यह आँकड़े अलग-अलग आधिकारिक संस्थाओं द्वारा जारी किए गए हैं।
अरबईन केंद्रीय मुख्यालय के अनुसार, अब तक 33 लाख 40 हज़ार से अधिक ईरानी ज़ायरीन इराक की पवित्र अतबात की ज़ियारत के लिए रवाना हुए, जबकि लगभग 25 लाख ज़ायरीन सकुशल अपने देश लौट चुके हैं। सभी सीमा चौकियों पर आवागमन सामान्य रहा।
इस वर्ष की अरबईन ऐसे समय में संपन्न हुई जब क्षेत्र हालिया ईरान-अमेरिका संघर्ष और कर्बला तथा बसरा पर हुए सऊदी अरब के हमलों के बाद कठिन परिस्थितियों से गुजर रहा था। लेकिन इन हालात ने इमाम हुसैन (अ.) के चाहने वालों के हौसले को ज़रा भी कमज़ोर नहीं किया। करोड़ों ज़ायरीन ने यह साबित कर दिया कि जब बात कर्बला की हो, तो डर, कठिनाइयाँ और चुनौतियाँ उनके कदम नहीं रोक सकतीं।
कर्बला केवल एक शहर नहीं, बल्कि त्याग, सत्य, न्याय और अडिग आस्था की वह धरती है जिसने सदियों से इंसानियत को प्रेरित किया है। हर वर्ष अरबईन में उमड़ने वाला जनसैलाब इस बात की गवाही देता है कि इमाम हुसैन (अ.) की याद आज भी करोड़ों दिलों में ज़िंदा है और उनके संदेश से जुड़ाव सीमाओं, भाषाओं और परिस्थितियों से परे है।

