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ईरान के खिलाफ युद्ध में ब्रिटेन के शामिल न होने की वजह सामने आई

ईरान के खिलाफ युद्ध में ब्रिटेन के शामिल न होने की वजह सामने आई

अमेरिकी समाचार नेटवर्क Fox News ने ब्रिटेन की सैन्य थिंक टैंकों और संसद की दो आधिकारिक रिपोर्टों के हवाले से खुलासा किया है कि ईरान के खिलाफ हमलों में लंदन की गैर-भागीदारी की मुख्य वजह उसकी “कमज़ोर होती सैन्य क्षमता और हथियारों के खाली हो चुके भंडार” हैं।

1. ब्रिटिश थिंक टैंक की रिपोर्ट

ब्रिटेन के प्रतिष्ठित रक्षा एवं सुरक्षा संस्थान Royal United Services Institute (RUSI) ने “ईरान युद्ध; ब्रिटेन के लिए सबक” शीर्षक से जारी रिपोर्ट में लिखा:

“जमीनी हकीकतों ने ब्रिटेन के हाथ बांध दिए हैं। पिछले कुछ वर्षों में वित्तीय दबाव और 2025 की रक्षा समीक्षा में ‘पहले नाटो’ नीति को प्राथमिकता देने के कारण मध्य पूर्व में हमारी सैन्य मौजूदगी काफी कम हो गई है।”

रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि ब्रिटिश सेना पूरी तरह निष्क्रिय नहीं रही। ब्रिटेन की एंटी-ड्रोन यूनिट्स और टाइफून लड़ाकू विमानों ने पहले जॉर्डन और इराक के ऊपर ईरानी ड्रोन गिराने में भाग लिया था, लेकिन उसके पास बड़े स्तर पर आक्रामक सैन्य अभियान चलाने की क्षमता नहीं बची है।

RUSI को ब्रिटेन और उसके पश्चिमी सहयोगियों का एक प्रमुख रणनीतिक एवं सैन्य थिंक टैंक माना जाता है। इसका काम युद्ध और सुरक्षा से जुड़ी वास्तविक परिस्थितियों का बिना राजनीतिक या कूटनीतिक दबाव के आकलन करना है।

2. ब्रिटिश संसद की रिपोर्ट

दूसरी रिपोर्ट ब्रिटेन की संसद के उच्च सदन House of Lords की अंतरराष्ट्रीय संबंध एवं रक्षा समिति द्वारा “नई वास्तविकताओं के साथ तालमेल: ब्रिटेन-अमेरिका साझेदारी का पुनर्गठन” शीर्षक से जारी की गई।

रिपोर्ट में चेतावनी दी गई है कि वॉशिंगटन के साथ अत्यधिक करीबी सहयोग ने लंदन में “निर्भरता की संस्कृति” पैदा कर दी है।

रिपोर्ट के अनुसार, इसी निर्भरता का परिणाम ब्रिटिश सेना की कार्यक्षमता में गिरावट और अमेरिका की नजरों में ब्रिटेन की विश्वसनीयता कम होने के रूप में सामने आया है।

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