क़तर और सऊदी अरब, ईरान पर अमेरिकी हवाई हमलों के प्रमुख सहयोगी
सऊदी अरब और क़तर एक ओर ईरान की मिसाइल प्रतिक्रिया की आलोचना कर रहे हैं, जबकि दूसरी ओर उपलब्ध हवाई निगरानी और विमानन संबंधी आँकड़े संकेत देते हैं कि इन दोनों देशों की धरती पर मौजूद अमेरिकी सैन्य ठिकानों ने ईरान के विरुद्ध चलाए गए अमेरिकी हवाई अभियानों में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। विमानन निगरानी के अनुसार, आज तड़के सऊदी अरब स्थित अमेरिकी वायुसेना अड्डे से बोइंग E-3 सेंट्री (AWACS) विमान ने उड़ान भरी। यह अत्याधुनिक विमान दुश्मन की गतिविधियों का समय रहते पता लगाने, हवाई क्षेत्र की निगरानी करने, लड़ाकू विमानों का मार्गदर्शन करने और पूरे हवाई अभियान का समन्वय करने के लिए इस्तेमाल किया जाता है। सैन्य विशेषज्ञों के अनुसार, ऐसे विमान किसी भी बड़े हवाई अभियान की सफलता में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।
दूसरी ओर, क़तर का अल-उदीद (Al Udeid) अमेरिकी वायुसेना अड्डा इस समय 20 से अधिक अमेरिकी KC-135 हवाई ईंधन भरने वाले विमानों की मेज़बानी कर रहा है। ये विमान हवा में ही अमेरिकी लड़ाकू विमानों को ईंधन उपलब्ध कराते हैं, जिससे वे लंबी दूरी तक लगातार अभियान चलाने में सक्षम रहते हैं। यही कारण है कि अल-उदीद को अमेरिका के सबसे महत्वपूर्ण विदेशी सैन्य अड्डों में गिना जाता है।
इन तथ्यों के सामने आने के बाद यह सवाल उठ रहा है कि जब सऊदी अरब और क़तर अपनी भूमि पर मौजूद अमेरिकी सैन्य सुविधाओं के माध्यम से ऐसे अभियानों को संभव बना रहे हैं, तो ईरान की जवाबी कार्रवाई की उनकी आलोचना किस हद तक उचित मानी जा सकती है।
अमेरिका द्वारा ईरान के तटीय क्षेत्रों पर हमले किए जाने के बाद, ईरान ने उन क्षेत्रीय ठिकानों को निशाना बनाया जिन्हें हमलों का स्रोत या संचालन केंद्र माना गया। इन्हीं में क़तर का अल-उदीद अमेरिकी वायुसेना अड्डा भी शामिल था। इससे पहले ईरान के ख़ातम अल-अंबिया केंद्रीय मुख्यालय ने स्पष्ट घोषणा की थी कि “ईरान पर होने वाले हमलों का स्रोत और उनका प्रारंभिक ठिकाना हमारे लिए वैध सैन्य लक्ष्य है।”

