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ट्रंप को लेकर अमेरिकी सोशल मीडिया पर नाराज़गी, हिंसक संकेतों वाली भाषा का इस्तेमाल: वॉशिंगटन पोस्ट

ट्रंप को लेकर अमेरिकी सोशल मीडिया पर नाराज़गी, हिंसक संकेतों वाली भाषा का इस्तेमाल: वॉशिंगटन पोस्ट

वाशिंगटन पोस्ट (The Washington Post) के हवाले से प्रकाशित एक रिपोर्ट में कहा गया है कि, डोनाल्ड ट्रंप (Donald Trump) को लेकर अमेरिकी सोशल मीडिया पर नाराज़गी, कटाक्ष और तीखी राजनीतिक भाषा लगातार बढ़ती जा रही है। रिपोर्ट के अनुसार, कई ऑनलाइन मंचों पर ऐसी टिप्पणियाँ और इशारे देखने को मिल रहे हैं जिनमें प्रत्यक्ष रूप से कुछ न कहते हुए भी हिंसक संकेतों वाली भाषा का इस्तेमाल किया जा रहा है।

वॉशिंगटन पोस्ट ने लिखा: “अमेरिकी इन्फ्लुएंसर पेटन वेन्स्ट ने हाल ही में एक वीडियो साझा किया, जिसमें वह ट्रंप से बेहद नाराज़ दिखाई देता है। वह अपना फ़ोन उठाकर रिकॉर्डिंग शुरू करता है और एक नाटकीय ठहराव के साथ कहता है: ‘किसी को चाहिए कि…’ फिर आगे कहता है: ‘किसी को चाहिए… आप समझ रहे हैं कि मैं क्या कहना चाहता हूँ?’”

यह 62 सेकंड का वीडियो टिकटॉक पर 7 लाख से अधिक लाइक्स और 32 लाख व्यूज़ हासिल कर चुका है। वहीं, इसी वीडियो के इंस्टाग्राम संस्करण को भी 14 लाख से अधिक बार देखा गया।

इस वीडियो पर टिप्पणी करने वाले हज़ारों लोगों में से एक ने लिखा: “यह अजीब है कि हम सब ठीक-ठीक समझते हैं कि तुम किस बारे में बात कर रहे हो।” यह अस्पष्ट मांग सोशल मीडिया पर उभरते एक ऐसे रुझान का हिस्सा बन गई है, जिसमें ट्रंप की हत्या के विचार को एक आम मज़ाक के रूप में पेश किया जा रहा है।

The Washington Post ने लिखा कि यह केवल एक वीडियो या एक टिप्पणी तक सीमित मामला नहीं है, बल्कि यह अमेरिका के राजनीतिक माहौल में बढ़ती कटुता, ध्रुवीकरण और सोशल मीडिया पर उभरती उग्र भाषा का प्रतीक बनता जा रहा है। रिपोर्ट के अनुसार, पहले जो बातें हाशिए पर समझी जाती थीं, अब वे इंटरनेट की चर्चाओं में मज़ाक, व्यंग्य या सांकेतिक भाषा के रूप में अधिक दिखाई देने लगी हैं।

अख़बार ने यह भी संकेत दिया कि राजनीतिक असहमति का यह स्वरूप अमेरिकी लोकतांत्रिक संवाद के लिए चिंता का विषय है, क्योंकि जब सार्वजनिक बहस में गुस्सा और संकेतों में कही गई हिंसक भाषा सामान्य होने लगे, तो समाज में वैचारिक टकराव और गहरा हो सकता है।

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