एक बार फिर, ट्रंप अपनी धमकी से पीछे हटे
अमेरिकी राष्ट्रपति ने इस्लामी गणराज्य ईरान की कड़ी चेतावनियों के सामने बुधवार तड़के कहा कि, उन्होंने ईरान के परमाणु संयंत्रों और ऊर्जा बुनियादी ढांचे पर हमलों को और दो हफ्तों के लिए टाल दिया है। यह फैसला इस बात का संकेत माना जा रहा है कि अमेरिका फिलहाल सीधे सैन्य टकराव से बचना चाहता है और हालात को काबू में रखने की कोशिश कर रहा है।
यह कदम इस बात का संकेत माना जा रहा है कि ईरान की सैन्य और रणनीतिक तैयारी ने अमेरिका को सीधे टकराव से पीछे हटने पर मजबूर कर दिया। ईरानी अधिकारियों ने पहले ही साफ कर दिया था कि किसी भी हमले का “कड़ा और व्यापक जवाब” दिया जाएगा, जिससे पूरे क्षेत्र में अमेरिकी हितों को गंभीर नुकसान हो सकता है।
विशेषज्ञों का मानना है कि ईरान ने हाल के वर्षों में अपनी रक्षा क्षमता, मिसाइल तकनीक और क्षेत्रीय सहयोगियों के नेटवर्क को काफी मजबूत किया है। यही वजह है कि अमेरिका, तमाम धमकियों के बावजूद, वास्तविक सैन्य कार्रवाई से बचता दिखाई दे रहा है।
रिपोर्ट के अनुसार, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने पहले ईरान के परमाणु ठिकानों और ऊर्जा से जुड़े अहम इंफ्रास्ट्रक्चर पर हमले की धमकी दी थी।
तेल अवीव ने भी अमेरिका-ईरान युद्धविराम को स्वीकार किया
इसी बीच, अमेरिकी मीडिया रिपोर्ट्स—खासकर CNN के हवाले से—यह भी सामने आया कि इज़रायल (तेल अवीव) ने भी इस अस्थायी युद्ध-विराम को स्वीकार कर लिया है। व्हाइट हाउस के एक वरिष्ठ अधिकारी के अनुसार, यह दो सप्ताह का युद्ध-विराम केवल अमेरिका और ईरान के बीच ही नहीं, बल्कि इसमें इज़रायल भी शामिल है। इसका मतलब है कि फिलहाल तीनों पक्ष किसी बड़े सैन्य कदम से परहेज करेंगे।
विशेषज्ञों के मुताबिक, यह अस्थायी युद्ध-विराम कूटनीतिक प्रयासों के लिए एक “विंडो” खोल सकता है, जिसमें बातचीत के जरिए तनाव कम करने की कोशिश की जा सकती है। हालांकि, यह भी माना जा रहा है कि यह सिर्फ एक अस्थायी राहत है और अगर बातचीत सफल नहीं होती, तो स्थिति फिर से बिगड़ सकती है।
कुल मिलाकर, यह घटनाक्रम दिखाता है कि हालात बेहद संवेदनशील हैं—जहां एक तरफ युद्ध का खतरा बना हुआ है, वहीं दूसरी तरफ फिलहाल टकराव को टालने की कोशिश भी जारी है।

