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ईरान युद्ध में न तो ट्रंप का ‘बिना शर्त आत्मसमर्पण’ का लक्ष्य पूरा हुआ, न सत्ता परिवर्तन का: अमेरिकी सीनेटर

ईरान युद्ध में न तो ट्रंप का ‘बिना शर्त आत्मसमर्पण’ का लक्ष्य पूरा हुआ, न सत्ता परिवर्तन का: अमेरिकी सीनेटर

अमेरिकी सीनेटर टैमी डकवर्थ ने डोनाल्ड ट्रंप की ईरान नीति और युद्ध संबंधी दावों पर तीखा हमला बोलते हुए कहा कि ट्रंप ने ईरान के साथ युद्ध में लगातार अपने लक्ष्य बदले, लेकिन एक भी उद्देश्य हासिल नहीं कर सके।

डकवर्थ ने कहा कि ट्रंप कभी ईरान से “बिना शर्त आत्मसमर्पण” की मांग करते रहे, तो कभी “ईरानी शासन परिवर्तन” की बात करने लगे, लेकिन न तो ईरान झुका और न ही वहां की सत्ता बदली।

उन्होंने कहा कि, ट्रंप प्रशासन ने दावा किया था कि ईरान के परमाणु ठिकानों को नष्ट कर दिया गया है, लेकिन बाद में खुद ही यह कहने लगा कि युद्ध तब तक खत्म नहीं होगा जब तक उन ठिकानों को पूरी तरह खत्म न कर दिया जाए। इससे साफ है कि व्हाइट हाउस के दावे और वास्तविकता में बड़ा अंतर है।

सीनेटर ने आरोप लगाया कि ट्रंप ने अमेरिकी जनता और दुनिया को भ्रमित करने के लिए बार-बार युद्ध के उद्देश्य बदले। पहले परमाणु कार्यक्रम रोकने की बात हुई, फिर ईरान की सैन्य ताकत खत्म करने का दावा किया गया और अब हॉर्मुज़ जलडमरूमध्य खोलने को नया लक्ष्य बताया जा रहा है, जबकि यह जलडमरूमध्य युद्ध से पहले भी खुला हुआ था।

डकवर्थ ने कहा कि अमेरिकी खुफिया एजेंसियां मानती हैं कि ईरान अब भी अपनी अधिकांश मिसाइल क्षमता बनाए हुए है। यानी भारी सैन्य कार्रवाई और अरबों डॉलर खर्च करने के बावजूद ट्रंप प्रशासन ईरान की सैन्य शक्ति को कमजोर करने में असफल रहा।

उन्होंने चेतावनी दी कि बिना स्पष्ट रणनीति के युद्ध छेड़ना अमेरिका को लंबे और खतरनाक संघर्ष में धकेल सकता है। उनके अनुसार ट्रंप की नीतियों ने न केवल क्षेत्रीय तनाव बढ़ाया, बल्कि ईरान को पहले से अधिक प्रभावशाली स्थिति में पहुंचा दिया है।

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