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ईरानियों को मालूम है कि दुश्मन की दुश्मनी केवल एक समझौते पर हस्ताक्षर से समाप्त नहीं होती: बक़ाई

ईरानियों को मालूम है कि दुश्मन की दुश्मनी केवल एक समझौते पर हस्ताक्षर से समाप्त नहीं होती: बक़ाई

ईरान के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता इस्माईल बक़ाई ने कहा है कि ईरानी राष्ट्र अपने ऐतिहासिक अनुभवों के आधार पर भली-भाँति जानता है कि शत्रुओं की शत्रुता केवल किसी समझौते या ज्ञापन पर हस्ताक्षर कर देने से समाप्त नहीं हो जाती। उन्होंने कहा कि ईरान सदैव कूटनीति और न्यायपूर्ण समझौते का समर्थक रहा है, लेकिन वह अपनी सुरक्षा, स्वतंत्रता और राष्ट्रीय हितों के प्रति किसी प्रकार की असावधानी नहीं बरतेगा।

बक़ाई ने अमेरिकी अधिकारियों द्वारा युद्ध-विराम और हालिया समझौतों के संबंध में दिए जा रहे परस्पर विरोधी बयानों की आलोचना करते हुए कहा कि ऐसे वक्तव्य ईरानी जनता के मन में वर्षों से संचित अविश्वास को कम करने के बजाय और अधिक गहरा करते हैं। उन्होंने कहा कि जब एक ओर समझौते की बात की जाती है और दूसरी ओर धमकियाँ, प्रतिबंध तथा दबाव की भाषा अपनाई जाती है, तो यह विश्वास निर्माण की प्रक्रिया को कमजोर करता है।

उन्होंने कहा कि ईरान ने अतीत में अनेक बार अपनी प्रतिबद्धताओं का पालन किया है, लेकिन उसे बदले में प्रतिबंधों, दबावों और वादाखिलाफी का सामना करना पड़ा। यही कारण है कि ईरानी जनता केवल शब्दों पर नहीं, बल्कि व्यवहारिक कदमों और वास्तविक कार्यान्वयन पर भरोसा करती है।

विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता ने स्पष्ट किया कि किसी भी संभावित अंतिम समझौते का मूल्यांकन उसके क्रियान्वयन, प्रतिबंधों के वास्तविक हटने और दूसरे पक्ष की प्रतिबद्धता के आधार पर किया जाएगा। उन्होंने कहा कि ईरान किसी भी प्रकार के दबाव या धमकी के सामने अपने वैध अधिकारों से पीछे नहीं हटेगा और अपनी राष्ट्रीय संप्रभुता तथा क्षेत्रीय हितों की रक्षा करता रहेगा।

बक़ाई ने बल देकर कहा कि ईरानी राष्ट्र ने कठिन परिस्थितियों में भी दृढ़ता, प्रतिरोध और आत्मनिर्भरता का परिचय दिया है। इसलिए यदि आज कोई समझौता होता भी है, तो वह केवल संघर्ष को समाप्त करने का एक चरण होगा; ईरान की सतर्कता और राष्ट्रीय सुरक्षा के प्रति उसकी प्रतिबद्धता पहले की तरह कायम रहेगी। उनके अनुसार, “विश्वास केवल हस्ताक्षरों से नहीं, बल्कि व्यवहार और प्रतिबद्धताओं के पालन से पैदा होता है।”

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