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अगर अमेरिका ने युद्ध छेड़ा, तो इस बार युद्ध क्षेत्रीय होगा: अली ख़ामेनेई

अगर अमेरिका ने युद्ध छेड़ा, तो इस बार युद्ध क्षेत्रीय होगा: अली ख़ामेनेई

ईरान की सरकारी समाचार एजेंसी सदा व सिमा की रिपोर्ट के अनुसार, ईरान के सुप्रीम लीडर आयतुल्लाह सैयद अली ख़ामेनई ने आज ईरान के सर्वोच्च स्वर्गीय नेता इमाम ख़ुमैनी के मक़बरे में बड़ी संख्या में लोगों से मुलाकात की। मुलाक़ात के दौरान उन्होंने पिछले महीने ईरान में होने वाली घटनाओं और अमेरिकी धमकियों पर बयां दिया।

उन्होंने अमेरिका की हालिया धमकियों पर कहा:
अमेरिका का कभी-कभी युद्ध की बातें करना और विमानों व युद्धपोतों का ज़िक्र करना कोई नई बात नहीं है। पहले भी अमेरिकी अधिकारी बार-बार धमकी देते रहे हैं और कहते रहे हैं कि सभी विकल्प मेज़ पर हैं, जिनमें युद्ध का विकल्प भी शामिल है। अब यह व्यक्ति भी (ट्रंप) लगातार दावा करता है कि हमने युद्धपोत भेज दिए हैं और वगैरह-वगैरह। ईरानी राष्ट्र को इन बातों से डराया नहीं जा सकता। ईरान की जनता ऐसी धमकियों से प्रभावित नहीं होती।

अगर अमेरिका ने युद्ध छेड़ा, तो इस बार युद्ध क्षेत्रीय होगा
हम युद्ध की शुरुआत करने वाले नहीं हैं और न ही हम किसी देश पर हमला करना चाहते हैं, लेकिन अगर कोई ईरानी राष्ट्र पर हमला करेगा या उसे नुकसान पहुंचाएगा, तो ईरान की जनता उसे करारा जवाब देगी। अमेरिकियों को यह जान लेना चाहिए कि अगर वे युद्ध छेड़ते हैं, तो इस बार युद्ध क्षेत्रीय होगा।

हालिया फितना एक तख्तापलट जैसा था, लेकिन विफ़ल हो गया: सुप्रीम लीडर
सुप्रीम लीडर ने आगे कहा, हालिया उपद्रव एक तख्तापलट जैसा था। हालांकि, यह तख्तापलट विफल कर दिया गया। उनका उद्देश्य देश के प्रशासन में अहम और प्रभावशाली संस्थानों को नष्ट करना था। इसी कारण उन्होंने पुलिस, सरकारी संस्थानों, स्पाह (रिवोल्यूशनरी गार्ड), बैंकों और मस्जिदों पर हमला किया और क़ुरआन को आग लगाई। उन्होंने उन केंद्रों पर हमला किया जो देश को चलाते हैं। यह पूरी घटना एक तख्तापलट जैसी थी। उन्होंने उन केंद्रों को निशाना बनाया जो देश को चलाते हैं। यह एक तख्तापलट जैसा ही था।

सुप्रीम लीडर ने पहलवी शासन को एक “व्यक्तिगत, तानाशाही, धर्म-विरोधी और विदेशी ताकतों पर निर्भर” सरकार बताते हुए कहा कि, इस शासन का पतन वैश्विक अहंकारी शक्तियों के दबाव के सामने डटकर खड़े रहने वाले”  एक “जन-आधारित, धर्म-प्रेरित और शासन में हुआ। उन्होंने कहा कि जिस तरह अतीत की सभी साजिशों को नाकाम किया गया, उसी तरह जनता ने हालिया अमेरिकी-इज़रायली साजिश की आग को भी राख में बदल दिया और भविष्य में भी, अल्लाह के मार्गदर्शन से, किसी भी घटना के सामने राष्ट्र निर्णायक रूप से खड़ा रहेगा।

आयतुल्लाह ख़ामेनेई ने अमेरिका द्वारा ईरान को निगलने की कोशिश और इसके विरुद्ध ईरानी राष्ट्र के साहसी प्रतिरोध को पिछले 47 वर्षों से जारी ईरान-अमेरिका टकराव का मूल कारण बताया। अमेरिकी अधिकारियों के हालिया बयानों का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि इससे पहले भी ईरानी जनता को डराने के लिए कहा जाता था कि “सभी विकल्प मेज़ पर हैं।” उन्होंने चेतावनी दी कि यदि इस बार युद्ध थोपा गया, तो वह “क्षेत्रीय युद्ध” होगा।

सर्वोच्च नेता ने कहा कि एक व्यक्तिगत और तानाशाही शासन का ऐसे शासन में बदलना जिसमें जनता ही असली मालिक हो, और पहलवी काल की धर्म-विरोधी प्रक्रिया का इस्लामी प्रक्रिया में रूपांतरण, इमाम और जनता के संघर्षों से जन्मी व्यवस्था की दो प्रमुख विशेषताएं हैं। उन्होंने कहा कि यदि सभी अधिकारी अपने कर्तव्यों का सही पालन करते, तो शासन पूरी तरह इस्लामी स्वरूप में आ चुका होता, हालांकि कुल मिलाकर देश ने इस दिशा में प्रगति की है।

इमाम ख़ुमैनी ने “हम नहीं कर सकते” की मानसिकता को “हम कर सकते हैं” के मजबूत विश्वास में बदल दिया
उन्होंने देश को उसके वास्तविक मालिकों यानी जनता को लौटाने और अमेरिका के प्रभाव व हस्तक्षेप को समाप्त करने को इस्लामी गणराज्य की एक और विशेषता बताया। यही बात अमेरिका को विचलित कर गई और उसी दिन से उसने ईरानी राष्ट्र और व्यवस्था से दुश्मनी शुरू कर दी। जन-आधारित शासन की व्याख्या करते हुए उन्होंने जनता में आत्मविश्वास की भावना के निर्माण पर जोर दिया और कहा कि इमाम ख़ुमैनी ने “हम नहीं कर सकते” की मानसिकता को “हम कर सकते हैं” के मजबूत विश्वास में बदल दिया।

उन्होंने क़ाजार और पहलवी काल की नीतियों को आत्मसमर्पण और परनिर्भरता का परिणाम बताते हुए कहा कि एक महान सभ्यतागत इतिहास रखने वाली कौम को अपमानित और पिछड़ा बना दिया गया था। लेकिन इमाम ख़ुमैनी ने राष्ट्र में आत्मविश्वास की नई आत्मा फूंकी और दिशा को 180 डिग्री बदल दिया।

कौन सोच सकता था कि एक दिन अमेरिका ईरान के हथियारों की नकल करेगा
देश की प्रगति का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि कौन सोच सकता था कि एक दिन अमेरिका, ईरान द्वारा बनाए गए हथियारों की नकल करेगा। यह सब आत्मविश्वास, आशा और उच्च आकांक्षाओं का परिणाम है, जो इमाम ख़ुमैनी ने राष्ट्र में जगाईं। उन्होंने विदेशी और घरेलू दुश्मनों के उस दुष्प्रचार की आलोचना की जिसमें कहा जाता है कि ईरानी युवाओं के पास कोई भविष्य नहीं है, और कहा कि ईरानी युवा न सिर्फ आशा और संकल्प रखते हैं बल्कि भविष्य का निर्माण भी करेंगे।

उन्होंने 22 बहमन को क्रांति की जीत और 12 फ़रवरी को जनमत द्वारा इस्लामी गणराज्य की स्थापना को 12 बहमन 1357 के परिणामों में से बताया और कहा कि ईश्वर की कृपा से इसके आशीर्वाद आज भी जारी हैं। अपने भाषण के दूसरे हिस्से में उन्होंने पिछले महीने 18 और 19 दी( फ़ारसी महीना) की घटनाओं को अमेरिकी और ज़ायोनी साजिश बताया और कहा कि दंगाइयों में प्रशिक्षित सरगना और भावनात्मक युवा शामिल थे। उन्होंने कहा कि कई सरगनाओं ने स्वीकार किया है कि उन्हें पैसे और प्रशिक्षण दिए गए थे।

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