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ट्रंप प्रशासन के पूर्व अधिकारी की चेतावनी, घेराबंदी और बमबारी से ईरान नहीं झुकेगा

ट्रंप प्रशासन के पूर्व अधिकारी की चेतावनी, घेराबंदी और बमबारी से ईरान नहीं झुकेगा

अमेरिका की पश्चिम एशिया नीति को लेकर एक अहम बयान सामने आया है। Joe Kent, जिन्होंने डोनाल्ड ट्रंप के शासनकाल में राष्ट्रीय आतंकवाद-रोधी तंत्र में अहम भूमिका निभाई थी, ने स्पष्ट शब्दों में कहा है कि केवल सैन्य दबाव, आर्थिक घेराबंदी और बमबारी के ज़रिये ईरान को झुकाना संभव नहीं है। उनका कहना है कि बीते दशकों के अनुभव बताते हैं कि अमेरिका ने कई युद्धों में सैन्य बढ़त तो हासिल की, लेकिन वह उन जीतों को स्थायी राजनीतिक और रणनीतिक सफलता में बदलने में नाकाम रहा।

उन्होंने इशारा किया कि इराक़ और अफ़ग़ानिस्तान में लंबे सैन्य अभियानों ने अमेरिका को भारी आर्थिक बोझ, सैनिकों की जान-माल के नुकसान और वैश्विक स्तर पर आलोचना के अलावा बहुत कम हासिल कराया। जो केंट के मुताबिक, अगर यही नीति ईरान के मामले में अपनाई जाती है, तो उसका परिणाम भी एक लंबे तनाव, क्षेत्रीय अस्थिरता और बढ़ती कीमत के रूप में सामने आ सकता है।

सोशल मीडिया मंच X पर जारी अपने संदेश में उन्होंने कहा कि अमेरिका के पास अब विकल्प यह नहीं है कि वह केवल ताक़त का प्रदर्शन करे, बल्कि यह तय करे कि पश्चिम एशिया में उसके वास्तविक हित क्या हैं और वह उन्हें किस व्यावहारिक रणनीति के साथ हासिल करना चाहता है। उनका मानना है कि ज़मीनी हक़ीक़त को नज़रअंदाज़ कर बनाई गई नीतियाँ अक्सर युद्ध को लंबा खींचती हैं और अंततः आम नागरिकों तथा करदाताओं पर उसका भारी बोझ पड़ता है।

विशेषज्ञों का मानना है कि यह बयान अमेरिकी नीति-निर्माण के भीतर चल रही उस बहस को भी उजागर करता है, जिसमें एक पक्ष सैन्य दबाव को समाधान मानता है, जबकि दूसरा पक्ष कूटनीति, क्षेत्रीय संवाद और संतुलित रणनीति को अधिक प्रभावी रास्ता बताता है। इस बयान ने ईरान को लेकर अमेरिकी नीति पर नई चर्चा को जन्म दिया है।

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