अमेरिकी विश्वविद्यालयों में पढ़ रही नई पीढ़ी इस्राईल को नरसंहार का दोषी मानती है: रिपोर्ट
ग़ाज़ा और अधिकृत वेस्ट बैंक में फ़िलिस्तीनियों के ख़िलाफ़ जारी इस्राईली सैन्य कार्रवाइयों और मानवाधिकारों के उल्लंघन को लेकर गंभीर चिंताओं के बीच, न्यूयॉर्क की विश्वविद्यालयों में पढ़ने वाले छात्र अब “नरसंहार” शब्द को इस्राईल के साथ जोड़कर देखने लगे हैं। यह रुझान अमेरिकी युवाओं के बीच इस्राईली राज्य की अंतरराष्ट्रीय छवि में हो रहे बदलाव का संकेत देता है।
न्यूयॉर्क यूनिवर्सिटी (NYU) और कोलंबिया यूनिवर्सिटी के छात्रों के बीच किए गए एक सर्वेक्षण में प्रतिभागियों से पूछा गया कि, इस्राईल का नाम सुनते ही उनके दिमाग में सबसे पहले क्या आता है। इस सवाल पर छात्रों की प्रतिक्रियाओं में एक समान रुझान दिखाई दिया। न्यूयॉर्क यूनिवर्सिटी के एक छात्र सैमुअल ने अनादोलु को बताया कि “इस्राईल” शब्द सुनते ही उनके दिमाग में आने वाले शुरुआती विचार “नेतन्याहू, नरसंहार और फ़िलिस्तीन” थे।
न्यूयॉर्क यूनिवर्सिटी की एक अन्य छात्रा मैडी ने कहा कि “नरसंहार” वह शब्द था जो उनके दिमाग में सबसे अधिक तीव्रता से आया। उन्होंने इस संबंध को “डरावना” बताया और इस्राईल को एक ऐसे राज्य के रूप में वर्णित किया जो अपनी सैन्य शक्ति का इस्तेमाल अपने से कहीं अधिक कमज़ोर लोगों के ख़िलाफ़ कर रहा है।
विश्वविद्यालय की एक एसोसिएशन के लिए धन जुटाने वाले छात्रों के एक समूह ने यह जानने के बाद टिप्पणी करने से इनकार कर दिया कि सवाल का विषय इस्राईल से संबंधित है। वहीं, कोलंबिया यूनिवर्सिटी के रोम नामक एक छात्र ने कहा, “आइए दुनिया को बचाएं… आइए शांति बनाए रखें।”
इस्राईल एक नकारात्मक ब्रांड बन गया है
हाल के दिनों में इस्राईल के पूर्व प्रधानमंत्री नफ़्ताली बेनेट ने भी इस रुझान को स्वीकार करते हुए अमेरिका में इस्राईल की सार्वजनिक छवि में आए बदलाव की बात मानी है। बेनेट ने कहा, “इस्राईली राज्य की स्थापना के बाद पहली बार, अमेरिकी जनता के बीच इस्राईल एक नकारात्मक ब्रांड बन गया है।” उन्होंने आगे कहा, “अगर आप किसी अमेरिकी छात्र से पूछें, ‘इस्राईल— आपके दिमाग में क्या आता है?’ तो वे कहते हैं— नरसंहार। यही स्थिति है। उन्होंने इसकी तुलना देशों से जुड़े पारंपरिक रूढ़िवादी विचारों (stereotypes) से करते हुए कहा, “आप इटली कहते हैं— पास्ता, स्पेगेटी। आप इस्राईल कहते हैं— ‘बच्चों का हत्यारा।’”
गौरतलब है कि ग़ाज़ा के स्वास्थ्य मंत्रालय के अनुसार, अक्टूबर 2023 में ग़ाज़ा में इस्राईल की सैन्य कार्रवाई शुरू होने के बाद से अब तक 73,000 से अधिक फ़िलिस्तीनी मारे जा चुके हैं और 1,74,200 से अधिक घायल हुए हैं।
आईसीजे (ICC) ने नेतन्याहू और गैलेंट के ख़िलाफ़ गिरफ़्तारी वारंट जारी किया है
इस्राईल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू और पूर्व रक्षामंत्री योआव गैलेंट के ख़िलाफ़ युद्ध अपराधों के आरोपों में अंतरराष्ट्रीय आपराधिक न्यायालय (ICC) ने गिरफ्तारी वारंट जारी किया है। वहीं, दक्षिण अफ्रीका दिसंबर 2023 से अंतरराष्ट्रीय न्यायालय (ICJ) में इस्राईल के ख़िलाफ़ नरसंहार के आरोपों से संबंधित मामला चला रहा है।

