अमेरिकी जहाज़ ‘ईरान के तट के पास आने की हिम्मत नहीं करते: ईरानी सेना
ईरान की सेना का कहना है कि अमेरिकी जहाज़ उसकी तटरेखा से काफी दूर रह रहे हैं, क्योंकि ईरान की नौसैनिक ताकत मज़बूत है। ईरान ने वॉशिंगटन के उन दावों को भी सिरे से ख़ारिज किया है, जिनमें कहा गया है कि ईरान की सैन्य ताक़त कमजोर या पूरी तरह नष्ट हो चुकी है।
ईरानी सेना के प्रवक्ता ब्रिगेडियर जनरल मोहम्मद अकरमिनिया ने कहा कि. ईरान की नौसैनिक सेनाएं अभी भी ओमान सागर, अरब सागर और उत्तरी हिंद महासागर में तैनात हैं और वहां अपना नियंत्रण बनाए हुए हैं। अकरमिनिया ने कहा, “अमेरिकी जहाज़ों को हमारे तट के पास आने की अनुमति न पहले दी गई है और न ही अब दी जा रही है।” उन्होंने कहा कि, इस समय अमेरिकी जहाज़ ईरान की तटरेखा से बहुत दूर काम कर रहे हैं और यह तथ्य ईरान की सैन्य ताक़त को दिखाता है।
उन्होंने कहा,
“अगर अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के दावे के मुताबिक़ ईरान की नौसेना नष्ट हो चुकी होती, तो दुश्मन हमारे तटों के पास आ जाता। लेकिन वह ऐसा करने की हिम्मत नहीं कर रहा है।” उनकी यह टिप्पणी ट्रंप के उन बार-बार किए गए दावों के जवाब में आई, जिनमें उन्होंने ईरान की सैन्य ताक़त को नष्ट करने की बात कही थी। अकरमिनिया ने ट्रंप के दावे को ग़लत बताया और कहा, “हम इस क्षेत्र में मौजूद हैं और क्षेत्र पर हमारा नियंत्रण है।”
अमेरिकी युद्धपोतों के पीछे हटने का दावा
ईरानी सेना के प्रवक्ता का यह बयान ईरान के इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) के एक प्रवक्ता के 9 सितंबर के बयान के बाद आया है। IRGC के प्रवक्ता ने कहा था कि, अमेरिकी युद्धपोत होर्मुज़ जलडमरूमध्य से कम से कम 400 किलोमीटर दूर चले गए हैं और उस समय कोई भी अमेरिकी युद्धपोत फारस की खाड़ी के अंदर मौजूद नहीं था। IRGC के प्रवक्ता ने यह भी कहा था कि अमेरिका के पास पश्चिम एशिया में लंबे समय तक सैन्य मौजूदगी बनाए रखने की क्षमता नहीं है।
ईरान की ओर से चेतावनी
ईरानी सेना के प्रवक्ता ने अमेरिका और ट्रंप को चेतावनी भी दी। उन्होंने कहा, “अगर उन्होंने फिर से ग़लत आकलन किया और नई आक्रामक कार्रवाई शुरू की, तो इस बार उन्हें पहले की तुलना में और अधिक निर्णायक, व्यापक और ताकतवर तरीके से निशाना बनाया जाएगा और उन्हें भारी हार का सामना करना पड़ेगा।”
अकरमिनिया ने अमेरिका की ओर से अप्रैल की शुरुआत में ईरान के अंदर एक अमेरिकी पायलट को बचाने के लिए कथित तौर पर चलाए गए अभियान से जुड़ी जानकारी को भी ख़ारिज किया। उन्होंने इस घटना के बारे में उस अमेरिकी पायलट के इंटरव्यू पर भी सवाल उठाए। अकरमिनिया ने कहा कि जैसा कि पश्चिमी और अमेरिकी मीडिया ने भी बताया है, इन पायलटों से कैमरे के सामने आकर कुछ बयान देने के लिए कहा गया था।
उन्होंने कहा कि पायलटों की बताई गई घटनाएं वास्तविकता से काफी अलग थीं। उनके अनुसार, अमेरिका अपनी अजेयता की एक ऐसी छवि बनाने की कोशिश करता है, जैसी हॉलीवुड फिल्मों में दिखाई जाती है, और फिर उस छवि को पूरी दुनिया के सामने पेश करता है। उन्होंने कहा कि पायलटों के इंटरव्यू और उनसे जुड़े दावे भी इसी प्रयास का हिस्सा थे।
अमेरिकी पायलट के बयान पर विवाद
इस सप्ताह की शुरुआत में अमेरिकी समाचार कार्यक्रम 60 Minutes में उस पायलट का इंटरव्यू प्रसारित किया गया था। इंटरव्यू में पायलट ने बताया कि वह लगभग 160 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से जमीन पर गिरा था, लेकिन उसे गंभीर चोट नहीं लगी और वह पास की ऊंचाई वाले इलाके तक पहुंचने में सफल रहा। उसके इस बयान पर सोशल मीडिया यूजर्स और कुछ सैन्य विशेषज्ञों ने सवाल उठाए और उसका मजाक भी उड़ाया।

