अमेरिका से भी बड़ी शक्तियों ने ईरान पर विजय पाने की कोशिश की, लेकिन वे ‘इतिहास के कूड़ेदान’ में समा गईं: रज़ाई
ईरान की सर्वोच्च राष्ट्रीय सुरक्षा परिषद के सचिव, मेजर जनरल मोहसिन रज़ाई ने कहा है कि अमेरिका से भी अधिक शक्तिशाली देशों ने ईरान पर विजय प्राप्त करने की कोशिश की, लेकिन अंततः वे सभी “इतिहास के कूड़ेदान” में समा गए। अगर अमेरिका ने यह ग़लती की उसका भी यही हश्र हो सकता है। प्रेस टीवी को दिए गए एक विशेष साक्षात्कार में उन्होंने कहा कि अमेरिका को ईरान के साथ टकराव में बार-बार हार का सामना करना पड़ा है, जिसके कारण अब वह आर्थिक युद्ध का सहारा ले रहा है।
युद्ध समाप्ति का फैसला ईरान करेगा, अमेरिका नहीं
रज़ाई के अनुसार, युद्ध कब समाप्त होगा, इसका फैसला ईरान करेगा, अमेरिका नहीं। उन्होंने कहा कि ईरान अपनी जायज़ मांगें पूरी होने तक प्रतिरोध जारी रखेगा। उनके मुताबिक, तेहरान ने पाकिस्तान, कतर और इराक़ के माध्यम से अमेरिका के सामने सात शर्तें रखी थीं। अमेरिका ने कुछ शर्तें स्वीकार कीं, लेकिन अन्य मुद्दों पर स्पष्ट जवाब नहीं दिया। ईरान ने अमेरिकी प्रतिक्रिया को अपर्याप्त बताया है। रज़ाई ने यह भी कहा कि ईरान कूटनीति जारी रखेगा, लेकिन अब वह बातचीत के पुराने तरीके पर वापस नहीं लौटेगा।
अमेरिकी तकनीकी ठिकानों को निशाना बनाने की चेतावनी
रज़ाई ने चेतावनी दी कि, यदि अमेरिका ने ईरान पर दोबारा हमला किया, तो पश्चिम एशिया में मौजूद अमेरिकी-संबद्ध तकनीकी बुनियादी ढाँचे को निशाना बनाया जा सकता है। उनके अनुसार, इस क्षेत्र में 2 ट्रिलियन डॉलर से अधिक मूल्य के तकनीकी संसाधन मौजूद हैं, जिनमें डेटा सेंटर, कृत्रिम बुद्धिमत्ता से जुड़ी सुविधाएँ और संचार केबल शामिल हैं। उन्होंने कहा कि ईरान ने अभी तक इन ठिकानों को अपने निशाने में शामिल नहीं किया है, लेकिन युद्ध दोबारा शुरू होने पर उन्हें नष्ट किया जा सकता है। उन्होंने यह भी दावा किया कि ईरान के पास ऐसी नई सैन्य क्षमताएँ हैं, जिनका जरूरत पड़ने पर इस्तेमाल किया जाएगा।
होर्मुज़ जलडमरूमध्य पर नियंत्रण
रज़ाई ने कहा कि ईरान होर्मुज़ जलडमरूमध्य के प्रबंधन पर अपना नियंत्रण बनाए रखेगा। यह समुद्री मार्ग वैश्विक तेल और ऊर्जा आपूर्ति के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है। उनके अनुसार, जहाजों की आवाजाही पर प्रतिबंधों से तेल, गैस, हीलियम और उर्वरकों की आपूर्ति प्रभावित हुई है तथा ऊर्जा की कीमतें बढ़ी हैं। उन्होंने अमेरिका पर ईरानी बंदरगाहों की नाकेबंदी करके समझौते का उल्लंघन करने का आरोप भी लगाया।
ईरानी जनता आत्मसमर्पण नहीं करेगी
रज़ाई ने दावा किया कि 3 करोड़ से अधिक ईरानियों ने संभावित अमेरिकी आक्रमण की स्थिति में हथियार उठाने के लिए ‘जांफ़दा’ अभियान में पंजीकरण कराया है। उन्होंने कहा कि ईरानी जनता आत्मसमर्पण नहीं करेगी और अपने अधिकारों की मान्यता मिलने तक संघर्ष जारी रखेगी। उनके अनुसार, युद्ध का अंतिम परिणाम ईरानी जनता की इच्छाशक्ति पर निर्भर करेगा।

