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ईरान पर हमले में अमेरिका के साथ जॉर्डन की कथित भूमिका

ईरान पर हमले में अमेरिका के साथ जॉर्डन की कथित भूमिका

हवाई यातायात (एविएशन) निगरानी से प्राप्त आंकड़ों के अनुसार, ईरान पर पिछली रात हुए अमेरिकी हमले में जॉर्डन की कथित भागीदारी की पुष्टि होती है।

रिपोर्ट के मुताबिक, अमेरिकी नौसेना का एक इलेक्ट्रॉनिक युद्धक विमान जॉर्डन के मुवफ़्फ़क अल-सल्ती एयर बेस से उड़ान भरकर मिशन पर गया। इसके अलावा, अमेरिकी ईंधन भरने वाले (टैंकर) विमान भी जॉर्डन से उड़े और अमेरिकी बलों की सहायता की। वहीं, एक समुद्री गश्ती विमान ईरान से संबंधित खुफिया जानकारी एकत्र करता रहा।

जॉर्डन ने कुछ घंटे पहले जारी एक बयान में स्वीकार किया कि ईरान की तीन बैलिस्टिक मिसाइलें जॉर्डन के भीतर कुछ लक्ष्यों पर आकर गिरीं।

जॉर्डन के विदेश मंत्री ने देश में अमेरिकी सैन्य मौजूदगी पर दी सफाई

जॉर्डन के विदेश मंत्री अयमन अल-सफ़दी ने कहा कि अमेरिका का जॉर्डन में कोई सैन्य अड्डा (बेस) नहीं है, लेकिन ओमान और वॉशिंगटन के बीच सैन्य सहयोग के तहत अमेरिकी सैनिक जॉर्डन में मौजूद हैं।

बता दें कि, आज ईरान ने जवाबी कार्रवाई करते हुए बहरीन, क़तर, कुवैत, जॉर्डन और ओमान में स्थित अमेरिकी सैन्य ठिकानों पर मिसाइलों और ड्रोन से हमले किए।

अमेरिकी ठिकानों पर ईरान की आज की कार्रवाई के तीन संदेश

राजनीतिक मामलों के विशेषज्ञ सीमियारी के अनुसार, आज की कार्रवाई का पहला संदेश यह है कि ईरानी बलों की फारस की खाड़ी में अमेरिकी सैन्य और नौसैनिक गतिविधियों पर पूरी निगरानी है और वे दुश्मन की हर गतिविधि पर कड़ी नज़र रखे हुए हैं।

दूसरा संदेश यह है कि क्षेत्र में अमेरिका द्वारा विभिन्न सैन्य ठिकानों, जिनमें रास अल-खैमाह और कुवैत भी शामिल हैं, पर की गई तैनातियां और सुरक्षा व्यवस्था प्रभावी साबित नहीं हुई हैं।

तीसरा संदेश यह है कि यदि अमेरिका तनाव का स्तर बढ़ाता है, तो इस्लामी गणराज्य ईरान भी उससे अधिक व्यापक और विविध तरीकों से जवाब देगा।

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