तुर्की, सऊदी और पाकिस्तान के बीच हुए रक्षा समझौते पर ईरान की प्रतिक्रिया: हमे मक्का रक्षा समझौते की कोई चिंता नहीं
ईरान के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता इस्माइल बक़ाई ने मक्का में हुए रक्षा समझौते और क्षेत्रीय सुरक्षा से जुड़े हालिया घटनाक्रम पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा है कि पश्चिम एशिया के देशों को अपनी सुरक्षा के लिए अमेरिका और क्षेत्र से बाहर की शक्तियों पर निर्भर रहने के बजाय आपसी सहयोग और स्वतंत्र सुरक्षा व्यवस्था को प्राथमिकता देनी चाहिए।
उन्होंने कहा कि पिछले कुछ वर्षों के घटनाक्रम ने क्षेत्रीय देशों को यह समझा दिया है कि सुरक्षा ऐसी वस्तु नहीं है, जिसे झूठे सुरक्षा-दावेदारों या बाहरी बिचौलियों से खरीदा जा सके। उनके अनुसार, क्षेत्र की स्थायी सुरक्षा केवल उसी समय संभव है जब क्षेत्रीय देश स्वयं अपनी सुरक्षा की जिम्मेदारी संभालें और वास्तविक ख़तरों की सही पहचान करें।
विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता ने कहा कि जो भी सुरक्षा योजना वास्तविक परिस्थितियों पर आधारित होगी और दुश्मन तथा खतरे को सही ढंग से पहचानेगी, वह क्षेत्रीय स्थिरता और सुरक्षा को मजबूत करने में मदद करेगी। उन्होंने विशेष रूप से इज़राइल की नीतियों और उसकी कथित अस्थिरता पैदा करने वाली कार्रवाइयों का उल्लेख करते हुए कहा कि क्षेत्रीय सुरक्षा व्यवस्था ऐसी होनी चाहिए जो अस्थिरता को बढ़ावा देने वाली ताकतों को रोक सके।
मक्का रक्षा समझौते को लेकर ईरान की संभावित चिंताओं के बारे में पूछे जाने पर बक़ाई ने स्पष्ट किया कि, ईरान के तुर्की, पाकिस्तान और यहां तक कि सऊदी अरब के साथ भी गहरे संबंध हैं। इसलिए केवल किसी क्षेत्रीय रक्षा समझौते के अस्तित्व को ईरान के लिए ख़तरे के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए।
उन्होंने कहा कि ईरानी जनता और पाकिस्तान तथा तुर्की की जनता के बीच सदियों पुराने सांस्कृतिक और सामाजिक संबंध हैं। इन देशों के बीच मौजूद ऐतिहासिक, सांस्कृतिक और मानवीय रिश्ते किसी भी राजनीतिक या सैन्य समझौते से कहीं अधिक गहरे हैं।
ईरान का मानना है कि क्षेत्रीय देशों के बीच सहयोग यदि वास्तव में उनकी अपनी सुरक्षा और स्थिरता के लिए हो, तो उसे सकारात्मक रूप से देखा जा सकता है। लेकिन यदि क्षेत्रीय सुरक्षा के नाम पर बाहरी शक्तियों को क्षेत्र में अधिक सैन्य और राजनीतिक भूमिका देने की कोशिश की जाती है, तो इससे तनाव कम होने के बजाय बढ़ सकता है।
अमेरिका पर ईरान की आपत्ति
ईरानी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता ने यह भी कहा कि हाल के घटनाक्रम ने यह दिखाया है कि क्षेत्रीय देश अमेरिका और क्षेत्र से बाहर के देशों द्वारा सुरक्षा प्रदान करने के दावों पर हमेशा भरोसा नहीं कर सकते।
ईरान लंबे समय से यह तर्क देता रहा है कि पश्चिम एशिया की सुरक्षा का समाधान बाहरी सैन्य शक्तियों की मौजूदगी में नहीं, बल्कि क्षेत्रीय देशों के बीच संवाद, आपसी सम्मान और सहयोग में है।
तेहरान के नजरिए से अमेरिका की सैन्य मौजूदगी और क्षेत्र में उसके सुरक्षा गठबंधन अक्सर तनाव को कम करने के बजाय क्षेत्रीय प्रतिस्पर्धा को बढ़ाते हैं। इसलिए ईरान क्षेत्रीय देशों से अपनी सुरक्षा नीतियों को स्वतंत्र बनाने और बाहरी शक्तियों पर निर्भरता कम करने की अपील करता रहा है।

