शंघाई सहयोग संगठन में सहयोग मज़बूत करने के लिए ईरान ने तीन प्रस्ताव पेश किए
ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेज़ेश्कियान ने शंघाई सहयोग संगठन (SCO) के शिखर सम्मेलन में क्षेत्रीय सुरक्षा, आर्थिक सहयोग और बहुपक्षवाद को मज़बूत करने पर जोर देते हुए सदस्य देशों के सामने तीन प्रमुख आर्थिक प्रस्ताव रखे। उन्होंने कहा कि सुरक्षा और विकास एक-दूसरे से अलग नहीं हैं और संगठन को सुरक्षा के साथ-साथ आर्थिक सहयोग पर भी समान रूप से ध्यान देना चाहिए।
पेज़ेश्कियान ने अपने संबोधन की शुरुआत किर्गिस्तान के राष्ट्रपति सदिर जापारोव और वहां की सरकार एवं जनता को शिखर सम्मेलन की मेजबानी के लिए धन्यवाद देकर की। उन्होंने कहा कि पिछले दो दशकों में शंघाई सहयोग संगठन ने साझा सुरक्षा चुनौतियों से निपटने के लिए विश्वास और सहयोग का महत्वपूर्ण मंच तैयार किया है। उनके अनुसार, स्थायी सुरक्षा टकराव से नहीं, बल्कि आपसी विश्वास, संप्रभुता के सम्मान, आंतरिक मामलों में हस्तक्षेप न करने और देशों के बीच सहयोग से हासिल की जा सकती है।
ईरानी राष्ट्रपति ने आतंकवाद, हिंसक उग्रवाद, मादक पदार्थों की तस्करी, संगठित अपराध और साइबर अपराध को क्षेत्र के प्रमुख सुरक्षा खतरों में शामिल किया। उन्होंने एकतरफा प्रतिबंधों, सैन्य शक्ति के इस्तेमाल और अंतरराष्ट्रीय कानून के कमजोर होते प्रभाव पर भी चिंता जताई। उन्होंने पश्चिम एशिया और ग़ाज़ा के हालात का उल्लेख करते हुए कहा कि बल और दबाव पर आधारित नीतियां पूरे क्षेत्र और विश्व की स्थिरता के लिए खतरा हैं।
इसके बाद उन्होंने आर्थिक सहयोग बढ़ाने के लिए ईरान की तीन प्रमुख पहलों का प्रस्ताव रखा।
पहला प्रस्ताव—वित्तीय और बैंकिंग सहयोग को मजबूत करना:
पेज़ेश्कियान ने सदस्य देशों के बीच व्यापारिक लेन-देन में राष्ट्रीय मुद्राओं के अधिक इस्तेमाल, साझा भुगतान और वित्तपोषण तंत्र विकसित करने तथा भविष्य में “शंघाई सहयोग संगठन बैंक” की स्थापना का सुझाव दिया। उनके अनुसार, इससे सदस्य देशों की आर्थिक क्षमता बढ़ेगी और बाहरी आर्थिक व्यवधानों के प्रति व्यापार एवं आपूर्ति श्रृंखलाओं की संवेदनशीलता कम होगी।
दूसरा प्रस्ताव—व्यापार और निवेश को समर्थन देने वाली संस्थाओं का विकास:
ईरान ने “शंघाई सहयोग संगठन निर्यात और निवेश बीमा संघ” स्थापित करने का प्रस्ताव रखा। इसका उद्देश्य सदस्य देशों के बीच व्यापार और निवेश को अधिक सुरक्षित बनाना तथा आर्थिक सहयोग के लिए आवश्यक संस्थागत ढांचा तैयार करना है।
तीसरा प्रस्ताव—ऊर्जा सुरक्षा को मजबूत करना:
ईरानी राष्ट्रपति ने सदस्य देशों की विशाल ऊर्जा क्षमता को देखते हुए “शंघाई सहयोग संगठन ऊर्जा कंसोर्टियम” बनाने का सुझाव दिया। यह कंसोर्टियम ऊर्जा के उत्पादन, आपूर्ति, हस्तांतरण और उपभोग के क्षेत्र में सहयोग का स्थिर मॉडल बन सकता है और वैश्विक ऊर्जा बाजार में संगठन की भूमिका को मजबूत कर सकता है।
इसके अलावा, पेज़ेश्कियान ने उभरते सुरक्षा खतरों से निपटने के लिए रणनीतिक सुरक्षा अध्ययन केंद्र और सदस्य देशों के बीच संवाद एवं विधायी अनुभवों के आदान-प्रदान के लिए संसदीय सभा स्थापित करने की पहल भी पेश की।
अंत में उन्होंने कहा कि बहुपक्षवाद का भविष्य प्रभावी संवाद और सहयोग तंत्र विकसित करने की सामूहिक क्षमता पर निर्भर करता है। ईरान ने शंघाई सहयोग संगठन को अधिक एकजुट, प्रभावी और मजबूत बनाने वाली पहलों में सक्रिय और रचनात्मक भागीदारी का आश्वासन दिया।

