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ईरान ने फ्रांस में विरोध प्रदर्शनों के हिंसक दमन से बचने की आवश्यकता पर ज़ोर दिया

ईरान ने फ्रांस में विरोध प्रदर्शनों के हिंसक दमन से बचने की आवश्यकता पर ज़ोर दिया

ईरान के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता ने आज शांतिपूर्ण विरोध प्रदर्शनों के दौरान मानवाधिकारों के सम्मान और फ्रांस में उनके हिंसक दमन से बचने की आवश्यकता पर जोर दिया। उन्होंने कहा: समस्या विरोध प्रदर्शन नहीं है; समस्या दोहरे मापदंड अपनाना है। यदि मानवाधिकार और विरोध करने का अधिकार सिद्धांत हैं, तो प्रदर्शनकारी की भौगोलिक स्थिति के आधार पर उनमें बदलाव नहीं होना चाहिए।

ईरान के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता इस्माइल बक़ाई ने आज, मंगलवार, (6 अक्टूबर 2026) को एक संदेश में फ्रांस में छात्र विरोध प्रदर्शनों के खिलाफ सुरक्षा बलों की हिंसक कार्रवाई और मानवाधिकारों के मुद्दे पर फ्रांसीसी सरकार के दोहरे रवैये का उल्लेख किया।

उन्होंने लिखा कि फ्रांस ने जनवरी 2026 में ईरान के संबंध में “बिना किसी डर के दंड के शांतिपूर्ण सभा” के अधिकार का सम्मान करने और प्रदर्शनकारियों के प्रति सरकार द्वारा “संयम” बरतने की आवश्यकता पर ज़ोर दिया था। फ्रांसीसी अधिकारियों ने ईरान के बाहर से दंगे और हिंसा के लिए उकसावे तथा ईरान में पुलिस एवं सुरक्षा केंद्रों पर सशस्त्र हमलों की खबरों से अवगत होने के बावजूद इसे “शांतिपूर्ण विद्रोह” बताया था।

उन्होंने आगे कहा कि अब फ्रांस में छात्रों के विरोध प्रदर्शन को “शहरी हिंसा” कहा जा रहा है। फ्रांस के गृह मंत्री संयम बरतने के पक्ष में नज़र नहीं आ रहे हैं और व्यवस्था बनाए रखने के लिए सुरक्षा बलों द्वारा तेज़ी से और निर्णायक हस्तक्षेप तथा बल प्रयोग की बात कर रहे हैं। वहीं, सरकार भी अशांति के लिए “राजनीतिक हेरफेर” और अति-वामपंथी समूहों की भूमिका को जिम्मेदार ठहरा रही है।

फार्स की रिपोर्ट के अनुसार, फ्रांस में छात्रों के विरोध प्रदर्शन आज अपने 14वें दिन में प्रवेश कर गए। ये प्रदर्शन स्कूलों की ख़राब स्थिति, शैक्षणिक संस्थानों की जर्जर हालत और शिक्षकों की कमी के विरोध में किए जा रहे हैं। इन प्रदर्शनों के दौरान फ्रांसीसी पुलिस की हिंसक प्रतिक्रिया भी सामने आई है। प्रकाशित ख़बरों के अनुसार, इन विरोध प्रदर्शनों में कम से कम 5,000 लोगों को गिरफ़्तार किया गया है और कुछ अन्य लोग गंभीर रूप से घायल हुए हैं।

बक़ाई ने आगे कहा: “यह स्पष्ट है कि पुलिस के खिलाफ हिंसा, आगज़नी और सार्वजनिक संपत्ति को नुकसान पहुंचाने का बचाव नहीं किया जा सकता। सरकार का दायित्व है कि वह सुरक्षा और सार्वजनिक व्यवस्था बनाए रखे। लेकिन विरोधाभास कहीं और है: जब वही व्यवहार और वही मापदंड ईरान में प्रदर्शनकारी के मामले में लागू होते हैं, तो उनकी व्याख्या एक तरह से क्यों की जाती है और जब प्रदर्शनकारी फ्रांस में होता है, तो दूसरी तरह से क्यों?”

बक़ाई  ने याद दिलाया: “समस्या विरोध प्रदर्शन नहीं है; समस्या दोहरे मापदंड अपनाना है। यदि मानवाधिकार और विरोध करने का अधिकार सिद्धांत हैं, तो प्रदर्शनकारी की भौगोलिक स्थिति के आधार पर उनमें बदलाव नहीं होना चाहिए।”

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