ईरान के ख़िलाफ़ किसी भी दुस्साहस का ऐसा जवाब देंगे, जिसकी दुश्मन कल्पना भी नहीं कर सकते: क़ालिबाफ़
ईरान की संसद के अध्यक्ष मोहम्मद बाक़िर क़ालिबाफ़ ने रविवार को संसद में अपने भाषण के दौरान अमेरिका और इस्राईल को कड़ी चेतावनी दी। उन्होंने कहा कि, ईरान की क्षेत्रीय अखंडता के ख़िलाफ़ किसी भी तरह की गुस्ताख़ी का ऐसा जवाब दिया जाएगा, जिसकी विरोधी कल्पना भी नहीं कर सकते। उन्होंने ज़ोर देकर कहा कि, युद्ध और हत्या की धमकियाँ ईरान को अपने अधिकारों तथा राष्ट्रीय हितों से पीछे हटने के लिए मजबूर नहीं कर सकतीं।
अमेरिका और इस्राईल पर निशाना
क़ालिबाफ़ ने इमाम ख़ुमैनी के 4 नवंबर 1964 के ऐतिहासिक भाषण का उल्लेख किया, जिसमें उन्होंने अमेरिकी नागरिकों को विशेष क़ानूनी छूट देने वाले कैपिटुलेशन क़ानून का विरोध किया था। क़ालिबाफ़ के अनुसार, इमाम ख़ुमैनी ने उस समय ही अमेरिका और इस्राईल के संबंधों तथा ईरान के संसाधनों पर विदेशी नियंत्रण के ख़तरों को उजागर कर दिया था।
उन्होंने कहा कि आज का ईरान पहलवी शासन के दौर जैसा कमज़ोर और विदेशी शक्तियों पर निर्भर देश नहीं है, बल्कि एक स्वतंत्र और शक्तिशाली क्षेत्रीय ताक़त है। उन्होंने अमेरिका पर आर्थिक प्रतिबंधों, सैन्य धमकियों और अन्य कार्रवाइयों के ज़रिए ईरान पर दबाव बनाने का आरोप लगाया।
क़ालिबाफ़ ने कहा कि अमेरिका ने ग़लत आकलन के कारण ईरान के ख़िलाफ़ युद्ध शुरू किया और अब वह खुद मुश्किल में फँस गया है। उन्होंने स्पष्ट किया कि जब तक अमेरिका अपना व्यवहार नहीं बदलता और पहले तोड़ी गई प्रतिबद्धताओं की वास्तविक भरपाई नहीं करता, तब तक उसके दावों पर भरोसा नहीं किया जा सकता।
महंगाई और जनता की आर्थिक स्थिति
क़ालिबाफ़ ने देश में लगातार बढ़ती महंगाई और जरूरी वस्तुओं की क़ीमतों पर भी चिंता जताई। उन्होंने कहा कि इसका सबसे अधिक असर ग़रीबों, मजदूरों, पेंशनभोगियों और कमज़ोर आर्थिक स्थिति वाले परिवारों पर पड़ रहा है।
उन्होंने सरकार द्वारा कुछ लोगों के लिए कलाबर्ग योजना के तहत खाद्य सहायता में 50 प्रतिशत की वृद्धि करने के फैसले का स्वागत किया। साथ ही उन्होंने सरकार से महंगाई पर नियंत्रण पाने और ज़रूरी वस्तुओं के वितरण में सुधार करने की अपील की।
उन्होंने यह भी कहा कि कलाबर्ग योजना से जुड़े दुकानदारों को भुगतान में देरी नहीं होनी चाहिए, क्योंकि इससे उनके कारोबार और कार्यशील पूँजी पर दबाव पड़ता है।
गैस बचत पर ज़ोर
सर्दियों में संभावित ऊर्जा संकट से निपटने के लिए क़ालिबाफ़ ने प्राकृतिक गैस की खपत कम करने की अपील की। उन्होंने बताया कि गैस बचत को बढ़ावा देने के लिए क़ानूनी व्यवस्था बनाई गई है और लगभग 100 निजी कंपनियाँ इस क्षेत्र में सक्रिय हैं।
उन्होंने प्रस्ताव रखा कि गैस बचाने से होने वाला आर्थिक लाभ सीधे लोगों के बैंक खातों में पहुँचाया जाए। उनका लक्ष्य देश में गैस की खपत कम से कम 10 प्रतिशत घटाना है।
क़ालिबाफ़ के भाषण का मुख्य संदेश था कि, ईरान अपनी संप्रभुता और सुरक्षा से समझौता नहीं करेगा, जबकि सरकार को महंगाई कम करने, जनता को आर्थिक राहत देने और ऊर्जा संकट रोकने के लिए ठोस क़दम उठाने चाहिए।

