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अमेरिका का लहजा पूरी तरह बदल गया है; परमाणु मुद्दे पर अभी कोई फैसला नहीं, लेकिन बहस जारी: रेज़ाई

अमेरिका का लहजा पूरी तरह बदल गया है; परमाणु मुद्दे पर अभी कोई फैसला नहीं, लेकिन बहस जारी: रेज़ाई

ईरान की सर्वोच्च राष्ट्रीय सुरक्षा परिषद के सचिव मेजर जनरल मोहसिन रेज़ाई ने पुष्टि की है कि यदि दोबारा युद्ध छिड़ता है, तो क्या ईरान को अपने मौजूदा परमाणु सिद्धांत पर कायम रहना चाहिए या नहीं, इस पर चर्चा जारी है। हालांकि, उन्होंने कहा कि अमेरिका के रुख़ और बयानबाज़ी में पूरी तरह बदलाव आया है। शनिवार रात सरकारी टेलीविजन को दिए एक साक्षात्कार में रेज़ाई ने कहा कि उन्हें अमेरिका के उपराष्ट्रपति जेडी वेंस का पत्र मिला है और उन्होंने उसका सावधानीपूर्वक अध्ययन किया है, लेकिन अभी तक उन्होंने इसका कोई औपचारिक जवाब नहीं दिया है।

उन्होंने कहा कि ईरान के परमाणु सिद्धांत को लेकर सरकार या किसी अन्य आधिकारिक निकाय की ओर से अभी तक कोई नया फैसला नहीं लिया गया है। उन्होंने कहा, “अभी तक कोई नया फैसला नहीं लिया गया है।” हालांकि, उन्होंने स्वीकार किया कि इस विषय पर आंतरिक चर्चा चल रही है। उन्होंने कहा, “बेशक, अब इस बात पर चर्चा हो रही है कि यदि फिर से युद्ध छिड़ता है, तो क्या हम पहले वाले परमाणु सिद्धांत को ही बनाए रखना चाहते हैं?”

रेज़ाई ने आगे कहा कि,

वाशिंगटन की भाषा और उसके रुख में बदलाव स्पष्ट रूप से दिखाई दे रहा है। उन्होंने कहा, “उनका लहजा पूरी तरह बदल गया है और यह बहुत अच्छा संकेत है।अल्हम्दुलिल्लाह, ईरानी राष्ट्र ने अपनी जीत और अपनी ताक़त को और मज़बूत किया है।”

रेज़ाई की ताजा टिप्पणियां ऐसे समय आई हैं, जब ईरान के अधिकारी बार-बार कह चुके हैं कि फिलहाल देश के परमाणु सिद्धांत में कोई बदलाव नहीं हुआ है। हालांकि, साथ ही यह संभावना भी खुली रखी गई है कि अमेरिका के व्यवहार के आधार पर इस सिद्धांत की समीक्षा की जा सकती है। इससे पहले सितंबर में अल जज़ीरा को दिए गए साक्षात्कार सहित कई मौकों पर रेज़ाई ने दिवंगत सर्वोच्च नेता के उस फतवे के प्रति प्रतिबद्धता दोहराई थी, जिसमें परमाणु हथियारों पर प्रतिबंध लगाया गया है।

हालांकि, उन्होंने चेतावनी भी दी थी कि यदि अमेरिका और इस्राईल की आक्रामकता तथा दबाव जारी रहता है, तो तेहरान परमाणु अप्रसार संधि (एनपीटी) में अपनी सदस्यता पर दोबारा विचार कर सकता है।

ईरान ने बातचीत दोबारा शुरू करने के लिए लगातार यह शर्त रखी है कि उसकी सात मांगों को पूरी तरह लागू किया जाए। इनमें सभी मोर्चों पर शत्रुता समाप्त करना, ईरान की जब्त या फ्रीज की गई संपत्तियों को मुक्त करना और नौसैनिक नाकेबंदी हटाना शामिल है। इसके साथ ही ईरान ने यह भी स्पष्ट किया है कि वह अपने संवर्धित परमाणु पदार्थ का एक ग्राम भी देश से बाहर नहीं जाने देगा।

परमाणु मुद्दे और जनता की मांगें

रेज़ाई ने जोर देकर कहा कि ईरानी जनता की मांगें जायज़ हैं। उन्होंने कहा, ईरान ने अंतरराष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा एजेंसी (आईएईए) के निरीक्षण में पूरा सहयोग किया है और उसके परमाणु कार्यक्रम के शांतिपूर्ण होने की पुष्टि के बावजूद दुश्मन ने ईरान के परमाणु केंद्रों को निशाना बनाया है। उन्होंने कहा, “जब लोग इन वास्तविकताओं को देखते हैं, तो वे पूछते हैं कि हमें पहले जैसी परिस्थितियों में ही क्यों बने रहना चाहिए?”

उन्होंने आगे कहा,

“परमाणु मुद्दे पर बदलाव की मांग जनता के बीच उठ रही है। ईरान के लोगों को अपनी मांगें रखने का अधिकार है, लेकिन सरकार ने अभी तक कोई नया फैसला नहीं लिया है।” उन्होंने कहा, “ईरान के लोग देख रहे हैं कि शांतिपूर्ण परमाणु गतिविधियों के बावजूद दुश्मन ने हमारी परमाणु सुविधाओं पर बमबारी की और हमारे देश पर हमला किया। इसी कारण इस तरह की मांगें सामने आ रही हैं।”

रेज़ाई ने दोहराया कि ईरान परमाणु अप्रसार संधि (एनपीटी) का सदस्य बना हुआ है और किसी भी परमाणु वार्ता में अपने अधिकारों के लिए मज़बूती से आवाज उठाएगा। उन्होंने कहा, “हम एनपीटी के सदस्य हैं और हमारे 22 अधिकार हैं। यदि प्रस्ताव परमाणु वार्ता से संबंधित है, तो हम अपने अधिकारों की मांग करेंगे। हम ईरानी जनता के अधिकारों के लिए मज़बूती से खड़े हैं और साथ ही समय के महत्व को भी ध्यान में रखते हैं। फिलहाल हम अमेरिकियों के जवाब का इंतजार कर रहे हैं।”

वेंस का पत्र और अमेरिका के रुख़ में बदलाव

अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस के पत्र के बारे में पूछे जाने पर रेज़ाई ने इसकी पुष्टि की। उन्होंने कहा, “मैंने पत्र का अध्ययन किया है, लेकिन अभी तक इसका जवाब नहीं दिया है। उनका लहजा पूरी तरह बदल गया है। यह ट्रंप के पिछले रुख़ से अलग है और यह ईरानी राष्ट्र की ताक़त तथा जीत के संकेतों में से एक है।” रेज़ाई ने पत्र की सामग्री के बारे में अतिरिक्त जानकारी देने से इनकार कर दिया। उन्होंने कहा कि अमेरिकी पक्ष ने अभी तक इस पत्र को सार्वजनिक नहीं किया है।

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