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ब्रिक्स सम्मेलन में ईरानी प्रतिनिधि और यूएई प्रतिनिधियों के बीच तीखी बहस का ख़ुलासा

ब्रिक्स सम्मेलन में ईरानी प्रतिनिधि और यूएई प्रतिनिधियों के बीच तीखी बहस का ख़ुलासा

ब्रिक्स सम्मेलन की एक बैठक में पर्यावरण से जुड़े मुद्दों पर चर्चा होनी थी, लेकिन बैठक के दौरान ईरान और संयुक्त अरब अमीरात (यूएई) के प्रतिनिधियों के बीच तीखी बहस हो गई। विवाद की शुरुआत यूएई की ओर से ईरान पर लगाए गए आरोपों से हुई। यूएई के प्रतिनिधि ने कहा कि हालिया युद्ध के दौरान ईरान की कार्रवाई से उनके देश को नुकसान पहुंचा।

खुर्संद ने तस्नीम समाचार एजेंसी से बातचीत में ईरान और यूएई के प्रतिनिधियों के बीच हुई इस बहस का पूरा विवरण बताया। उन्होंने यह भी बताया कि ईरानी प्रतिनिधिमंडल ने अमीराती पक्ष को क्या जवाब दिया और दोनों पक्षों के रुख में तीखापन क्यों आया। उनके अनुसार, तेहरान का मानना है कि क्षेत्र के देशों में अमेरिकी सैनिकों और सैन्य संसाधनों की मौजूदगी को युद्ध के परिणामों से अलग करके नहीं देखा जा सकता।

ईरान के पर्यावरण संरक्षण संगठन के अंतरराष्ट्रीय मामलों और कन्वेंशनों के प्रमुख अरमान खुर्संद ने बताया कि यूएई पहले भी ब्रिक्स की पिछली बैठकों में इस तरह के आरोप लगा चुका था। उनके अनुसार, ईरानी प्रतिनिधिमंडल को भारत पहुंचने के बाद अपने दूतावास के माध्यम से इस बात की जानकारी मिली थी।

ब्रिक्स की बैठक में ईरान की ओर से पहले भाषण दिया गया। ईरानी प्रतिनिधिमंडल ने अपने भाषण में युद्ध, अमेरिका और इजरायल के हमलों तथा ईरान को हुए नुकसान का जिक्र किया। हालांकि, ईरान ने अपने भाषण में किसी पड़ोसी देश पर आरोप नहीं लगाया।

इसके बाद यूएई के मंत्री ने अपने भाषण में ईरान पर निशाना साधा और दावा किया कि उनके देश को ईरान की कार्रवाई से नुकसान हुआ है। इसके जवाब में ईरानी प्रतिनिधिमंडल ने विदेश मंत्रालय के अधिकारियों के साथ मिलकर एक कूटनीतिक जवाब तैयार किया। अरमान खुर्संद ने बैठक में लिखित जवाब पढ़ा।

खुर्संद के मुताबिक, अंतरराष्ट्रीय बैठकों में सामान्य नियम है कि यदि कोई देश दूसरे देश का नाम लेकर कोई आरोप लगाता है तो संबंधित देश को जवाब देने का अधिकार मिलता है। जवाब देने के बाद आम तौर पर मामला समाप्त हो जाता है। लेकिन इस बैठक में अध्यक्ष ने यूएई के प्रतिनिधिमंडल को दोबारा बोलने का मौका दिया।

यूएई की दूसरी प्रतिक्रिया पहले से ज्यादा तीखी थी। अमीराती प्रतिनिधियों ने कहा कि उनका देश एक विकसित और सफल मॉडल है और कुछ लोग उसकी प्रगति से खुश नहीं हैं। ईरानी प्रतिनिधि ने इन बातों को बेहद अनुचित बताया और कहा कि युद्ध के दौरान यूएई की भूमिका को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता।

ईरान का मुख्य आरोप यह था कि अमेरिका ने क्षेत्र के कुछ देशों की सैन्य सुविधाओं और संसाधनों का इस्तेमाल ईरान के खिलाफ सैन्य कार्रवाई में किया। खुर्संद ने विशेष रूप से अबू धाबी से अमेरिकी ईंधन भरने वाले विमानों के उड़ान भरने का उल्लेख किया। उनका कहना था कि अमेरिकी सैन्य विमान क्षेत्र में मौजूद सुविधाओं का इस्तेमाल करते थे और ईरान पर हमले के बाद वापस उन्हीं स्थानों पर लौटते थे।

ईरानी पक्ष का तर्क था कि अगर किसी देश की जमीन, हवाई क्षेत्र या सैन्य सुविधाओं का इस्तेमाल किसी दूसरे देश पर हमला करने के लिए किया जाता है, तो वह देश पूरी तरह यह नहीं कह सकता कि उसका युद्ध से कोई संबंध नहीं था। खुर्संद ने कहा कि यदि कोई देश अपनी कमजोरी के कारण किसी बड़ी शक्ति को रोकने में असमर्थ है, तो स्थिति अलग हो सकती है, लेकिन सैन्य सुविधाएं उपलब्ध कराने के बाद पूरी तरह जिम्मेदारी से बचना उचित नहीं है।

खुर्संद ने यह भी कहा कि ईरान के खाड़ी देशों के साथ लंबे समय से ऐतिहासिक संबंध रहे हैं। उन्होंने उदाहरण देते हुए कहा कि ईरान ने अलग-अलग मौकों पर कतर और कुवैत जैसे देशों की मदद की है। इसलिए ईरान का मानना है कि पड़ोसी देशों को उसके खिलाफ सैन्य कार्रवाई में किसी बाहरी शक्ति की मदद नहीं करनी चाहिए।

अंत में ईरानी प्रतिनिधि ने स्पष्ट संदेश देते हुए कहा कि जो देश ईरान के खिलाफ होने वाले हमले के लिए अपने क्षेत्र या सुविधाओं का इस्तेमाल करने देंगे, उन्हें उसके परिणामों को भी स्वीकार करना होगा। उनका कहना था कि ईरान अपनी जमीन और अपने लोगों की रक्षा के मामले में किसी के साथ समझौता नहीं करेगा।

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