न्यूयॉर्क: संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद की मध्य पूर्व पर आयोजित बैठक में ईरान के स्थायी मिशन के उप प्रतिनिधि और राजदूत गुलामहुसैन दरज़ी ने गाज़ा की स्थिति को लेकर इस्राईल और अमेरिका पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि घोषित युद्धविराम के बावजूद गाज़ा अब भी तबाही और नाकेबंदी का सामना कर रहा है तथा इज़राइल लगातार सैन्य कार्रवाई और मानवीय सहायता पर कड़े प्रतिबंध लगाकर युद्धविराम का उल्लंघन कर रहा है।
दरज़ी ने कहा कि इन कार्रवाइयों से गाज़ा के आम नागरिकों की पीड़ा लगातार बढ़ रही है। उन्होंने आरोप लगाया कि इस्राईल पश्चिमी तट (वेस्ट बैंक) में अवैध बस्तियों का विस्तार जारी रखे हुए है, जो अंतरराष्ट्रीय कानून और संयुक्त राष्ट्र के संबंधित प्रस्तावों का खुला उल्लंघन है।
उन्होंने यह भी कहा कि लेबनान के खिलाफ इस्राईल की बार-बार की सैन्य कार्रवाई और सीरिया की संप्रभुता तथा क्षेत्रीय अखंडता का उल्लंघन पूरे क्षेत्र की शांति और सुरक्षा के लिए गंभीर खतरा है।
ईरानी राजनयिक ने कहा कि किसी भी विश्वसनीय समाधान के लिए गाज़ा में स्थायी युद्धविराम, बिना किसी बाधा के मानवीय सहायता, इज़राइली सैनिकों की पूर्ण वापसी और संयुक्त राष्ट्र में फिलिस्तीन को पूर्ण सदस्यता सुनिश्चित करना आवश्यक है।
दरज़ी ने जोर देकर कहा कि गाज़ा के पुनर्निर्माण और मानवीय सहायता को कभी भी राजनीतिक या सैन्य उद्देश्यों से नहीं जोड़ा जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि अंतरराष्ट्रीय मानवीय कानून के कथित उल्लंघनों के लिए जवाबदेही तय होना जरूरी है और इस्राईल के साथ-साथ उसे राजनीतिक, सैन्य या आर्थिक समर्थन देने वाले देशों को भी जिम्मेदार ठहराया जाना चाहिए।
उन्होंने यह भी कहा कि 21 नवंबर 2024 को अंतरराष्ट्रीय अपराध न्यायालय (ICC) द्वारा इस्राईल के प्रधानमंत्री के खिलाफ जारी गिरफ्तारी वारंट इस बात का स्पष्ट संदेश है कि कोई भी व्यक्ति अंतरराष्ट्रीय कानून से ऊपर नहीं है।
सुरक्षा परिषद की बैठक में अमेरिकी प्रतिनिधि द्वारा लगाए गए आरोपों का जवाब देते हुए दरज़ी ने उन्हें पूरी तरह निराधार और राजनीतिक उद्देश्य से प्रेरित बताया। उन्होंने कहा कि अमेरिका ईरान के खिलाफ अपने कथित आक्रामक कदमों को सही ठहराने के लिए झूठे आरोप और गलत सूचनाओं का सहारा ले रहा है।
ईरानी प्रतिनिधि ने आरोप लगाया कि अमेरिका और इज़राइल लंबे समय से ईरान के खिलाफ शत्रुतापूर्ण नीति अपना रहे हैं और क्षेत्र में अपनी सैन्य मौजूदगी को उचित ठहराने के लिए ऐसे दावे कर रहे हैं।
दरज़ी ने यह भी कहा कि अमेरिका ने ईरान के खिलाफ कार्रवाई कर संयुक्त राष्ट्र चार्टर और अंतरराष्ट्रीय कानून के मूल सिद्धांतों का उल्लंघन किया है। उन्होंने आरोप लगाया कि अमेरिकी हमलों में स्कूलों, अस्पतालों, स्वास्थ्य केंद्रों, पुलों और अन्य नागरिक ढांचों को निशाना बनाया गया, जो अंतरराष्ट्रीय मानवीय कानून के गंभीर उल्लंघन हैं। उन्होंने मीनाब स्कूल पर हुए हमले को इसका उदाहरण बताया।

