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आईआरजीसी ने किया जॉर्डन सैनिकों का शुक्रिया, दसियों अमेरिकी सैनिक हलाक

तेहरान : ईरान और अमेरिका के बीच जारी टकराव के बीच एक नया दावा सामने आया है। ईरान की इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) ने आरोप लगाया है कि जॉर्डन से उसे अमेरिकी सैन्य ठिकानों की खुफिया जानकारी मिली थी, जिसके आधार पर उसने हमले किए।

ईरानी दावे के मुताबिक, रविवार को जॉर्डन में मौजूद अमेरिकी ठिकानों को निशाना बनाया गया। तेहरान का कहना है कि जॉर्डन से मिली सूचनाओं के बाद ड्रोन के जरिए अमेरिकी ठिकानों पर हमले किए गए। हालांकि, जॉर्डन की सेना ने इन आरोपों पर अभी तक कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं दी है।

बताया जा रहा है कि हमलों में जॉर्डन स्थित अमेरिकी सैन्य सुविधाओं को नुकसान पहुंचा है। ईरान का दावा है कि अमेरिकी रसद केंद्र को भी भारी नुकसान हुआ है। हमले से जुड़े कुछ वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से फैल रहे हैं, हालांकि उनकी स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है।

रिपोर्टों के अनुसार, अमेरिकी अधिकारी इस बात की जांच कर रहे हैं कि इतने सटीक हमलों के पीछे जानकारी का स्रोत क्या था। शुरुआती आशंका थी कि यह हमला किसी बाहरी खुफिया नेटवर्क की मदद से किया गया हो सकता है, लेकिन IRGC के बयान के बाद जांच का दायरा बदल गया है।

ईरानी हमलों में दो सैनिकों की मौत और एक सैनिक के लापता होने का दावा किया गया है। अमेरिका ने इन आंकड़ों पर अभी कोई विस्तृत बयान नहीं दिया है। इससे पहले भी क्षेत्र में हुए हमलों में अमेरिकी सैनिकों के हताहत होने की खबरें सामने आई थीं।

ईरान-अमेरिका संघर्ष के बीच खाड़ी क्षेत्र में मौजूद अमेरिकी सैन्य ठिकाने लगातार निशाने पर हैं। कुछ रिपोर्टों में दावा किया गया है कि कुवैत, कतर और बहरीन में अमेरिकी सुविधाओं को नुकसान पहुंचा है। वहीं, सैटेलाइट तस्वीरों के आधार पर हुए आकलनों में पश्चिम एशिया और खाड़ी क्षेत्र में कई सैन्य ढांचों के प्रभावित होने की बात कही गई है।

फिलहाल सबसे बड़ा सवाल यही है कि ईरान को अमेरिकी ठिकानों की इतनी सटीक जानकारी कैसे मिली और क्या इसके पीछे किसी क्षेत्रीय सहयोग की भूमिका थी। जांच पूरी होने के बाद ही तस्वीर साफ हो पाएगी।

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